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| मऊगंज सिविल अस्पताल का 'ताला तंत्र': ओपीडी के समय डॉक्टर नदारद, कमरों पर लटके मिले ताले! Aajtak24 News |
मऊगंज - मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश को 'स्वस्थ मध्य प्रदेश' बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट और बेहद कड़वी है। सबसे विडंबनापूर्ण स्थिति तो मऊगंज जिले की है, जो प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री का गृह क्षेत्र माना जाता है। सोमवार शाम जब अपर कलेक्टर ने सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, तो जो नजारा दिखा उसने समूचे प्रशासनिक और स्वास्थ्य अमले को शर्मसार कर दिया। ओपीडी के निर्धारित समय पर विशेषज्ञ डॉक्टरों के कक्षों में ताले लटके मिले, जो इस बात का प्रमाण है कि यहाँ नियम नहीं, बल्कि मनमानी चलती है।
निरीक्षण में उजागर हुआ 'झूठ का पुलिंदा'
सोमवार शाम करीब 5 बजे जब अपर कलेक्टर अचानक अस्पताल परिसर पहुँचे, तो वहां हड़कंप मच गया। एक तरफ अस्पताल प्रशासन '24 घंटे मुस्तैद' रहने के लंबे-चौड़े दावे कर रहा था, तो दूसरी तरफ हकीकत इन दावों के गाल पर तमाचे जैसी थी। ओपीडी का समय होने के बावजूद कई महत्वपूर्ण विभागों के कमरों में ताले लटके थे। जब अधिकारी ने डॉक्टरों की मौजूदगी के बारे में सवाल किए, तो संतोषजनक जवाब देने वाला कोई नहीं था। यह स्थिति दर्शाती है कि यहाँ डॉक्टरों को न तो प्रशासनिक अधिकारियों का खौफ है और न ही मरीजों की पीड़ा की परवाह।
निजी प्रैक्टिस और दलालों का संगठित सिंडिकेट
अस्पताल के गलियारों में भटकते मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल की इस बदहाली के पीछे एक सोची-समझी साजिश है। आरोप है कि कई विशेषज्ञ डॉक्टर सरकारी ड्यूटी के समय अपने निजी क्लीनिकों को समय देते हैं। अस्पताल परिसर में सक्रिय दलालों का नेटवर्क उन मरीजों को निशाना बनाता है जो दूर-दराज के गांवों से इलाज की उम्मीद में आते हैं। डॉक्टर की अनुपलब्धता का बहाना बनाकर इन मरीजों को निजी सेंटरों की ओर धकेल दिया जाता है, जहाँ उनसे मोटी रकम वसूली जाती है।
स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र में ऐसी लापरवाही क्यों?
जनता के बीच अब यह बड़ा सवाल तैर रहा है कि यदि माननीय स्वास्थ्य मंत्री के अपने ही जिले और प्रभाव वाले क्षेत्र में यह हाल है, तो प्रदेश के सुदूर अंचलों की स्थिति क्या होगी? क्या मंत्री जी के संज्ञान में यह बात नहीं है कि उनके क्षेत्र की जनता इलाज के लिए दर-दर भटक रही है? औचक निरीक्षण में ताले मिलना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र की विफलता है जो गरीबों को मुफ्त और सुलभ इलाज देने का वादा करता है।
निष्कर्ष: कार्रवाई की आस में जनता
मऊगंज की जागरूक जनता अब केवल 'दिखावे की जांच' से संतुष्ट होने वाली नहीं है। सोमवार के निरीक्षण के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि अनुपस्थित डॉक्टरों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी और उनके निजी प्रैक्टिस के मोह पर लगाम कसी जाएगी। क्या प्रशासन उन दलालों और भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ को तोड़ पाएगा, जिन्होंने अस्पताल को 'रेफरल सेंटर' और 'उगाही का केंद्र' बना दिया है?
