विंध्य के RTO चेकपोस्ट या 'वसूली के किले'? सोहागी में चालक का फूटा सिर, तो उखड़ गए भ्रष्टाचार के तंबू! Aajtak24 News

विंध्य के RTO चेकपोस्ट या 'वसूली के किले'? सोहागी में चालक का फूटा सिर, तो उखड़ गए भ्रष्टाचार के तंबू! Aajtak24 News

रीवा/मऊगंज - मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक तरफ प्रदेश को 'भ्रष्टाचार मुक्त' बनाने का संकल्प दोहराते हैं, वहीं दूसरी ओर विंध्य क्षेत्र के रीवा और मऊगंज जिलों में परिवहन विभाग (RTO) के चेकपोस्ट 'अवैध उगाही के अड्डों' में तब्दील हो चुके हैं। सोमवार रात सोहागी चेक पॉइंट पर जो कुछ भी हुआ, वह महज एक मारपीट की घटना नहीं, बल्कि सालों से दबे हुए उस आक्रोश का विस्फोट है, जो सिस्टम की 'गुंडागर्दी' के खिलाफ भड़का है।

नियमों की धज्जियां, 'चमचों' का राज

हैरानी की बात यह है कि इन सरकारी चेकपोस्टों पर विभाग के असली अधिकारियों से ज्यादा उन 'निजी गुर्गों' और 'नेताओं के पाले हुए चमचों' का बोलबाला है, जिनका सरकारी सेवा से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। सूत्रों का दावा है कि विभाग का आधिकारिक रजिस्टर इन बाहरी लोगों के हाथ में होता है, जो नियम-कायदों के बजाय 'एंट्री फीस' और 'सेवा शुल्क' का हिसाब-किताब रखते हैं। वर्दी की आड़ में चल रहा यह निजी सेना का नेटवर्क सीधे तौर पर आम जनता और ट्रक चालकों के खून-पसीने की कमाई पर डाका डाल रहा है।

सोहागी कांड: जब सब्र का बांध टूटा

सोमवार रात सोहागी में जो मंजर दिखा, उसने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी। एक ट्रक चालक का सिर सिर्फ इसलिए फोड़ दिया गया क्योंकि उसने शायद 'अवैध मांग' के आगे झुकने से इनकार कर दिया था। इस खून ने वहां मौजूद सैकड़ों चालकों के भीतर दबे गुस्से को चिंगारी दे दी। परिणाम स्वरूप, न केवल चक्काजाम हुआ, बल्कि चालकों ने उन 'अवैध छावनियों' और केबिनों को उखाड़ फेंका, जहाँ बैठकर रात के अंधेरे में उगाही का काला खेल खेला जाता था। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब 'डंडे के दम पर वसूली' का दौर खत्म होने वाला है।

सफेदपोशों का 'अभयदान' और प्रशासनिक मौन

गली-चौराहों पर चर्चा आम है कि इस काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा 'ऊपर' तक पहुँचता है। यही कारण है कि आए दिन सोशल मीडिया पर वसूली के वीडियो वायरल होने के बावजूद, परिवहन विभाग कभी कोई 'प्रेस विज्ञप्ति' जारी कर अपना पक्ष रखने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। हर बार 'जांच का झुनझुना' थमाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। डिप्टी सीएम और क्षेत्रीय कद्दावर नेताओं के गृह क्षेत्र में चल रहा यह 'नंगा नाच' सरकार की छवि को धूमिल कर रहा है। आखिर इन भ्रष्ट प्यादों के पीछे कौन सा 'वजीर' बैठा है, जिसे कानून का खौफ नहीं?

व्यवस्था पर सुलगते सवाल

क्या मध्य प्रदेश में अब परिवहन नियमों का पालन केवल 'सेवा शुल्क' देने से तय होगा? क्या पुलिस और प्रशासन इन निजी गुर्गों के खिलाफ कार्रवाई करने का साहस जुटा पाएंगे? सोहागी की घटना ने यह साफ कर दिया है कि यदि जल्द ही इन 'उगाही के अड्डों' को बंद नहीं किया गया, तो विंध्य की सड़कों पर आक्रोश की यह आग और भीषण रूप ले सकती है। जनता अब केवल 'जांच' नहीं, बल्कि उन चेहरों को बेनकाब होते देखना चाहती है, जो खादी और खाकी की आड़ में इस लूट को संरक्षण दे रहे हैं।




Post a Comment

Previous Post Next Post