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| रीवा आबकारी अधिकारी अनिल जैन पर गहराया संकट: हाईकोर्ट से 'स्टे' हटने के बाद कार्यमुक्त करने की मांग उठी Aajtak24 News |
रीवा - रीवा जिले के विवादित जिला आबकारी अधिकारी अनिल जैन की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा उनके पक्ष में जारी स्थगन आदेश (Stay Order) को निरस्त किए जाने के बाद अब उन्हें पद से कार्यमुक्त करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता बी.के. माला ने रीवा संभाग आयुक्त को एक औपचारिक आवेदन सौंपकर अनिल जैन को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने की मांग की है।
न्यायालयीन घटनाक्रम और 'स्टे' का अंत एडवोकेट बी.के. माला द्वारा सौंपे गए आवेदन के अनुसार, अनिल जैन के विरुद्ध चल रहे प्रकरण में राज्य शासन ने उच्च न्यायालय जबलपुर में एक रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) दायर की थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अनिल जैन को पूर्व में दिए गए कानूनी संरक्षण यानी स्थगन आदेश को समाप्त कर दिया है और संबंधित याचिका को निराकृत (Dispose) कर दिया है।
जानकारी छिपाने का आरोप शिकायतकर्ता का तर्क है कि अनिल जैन ने पूर्व में अपने विरुद्ध दर्ज एफआईआर और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी छिपाकर माननीय उच्च न्यायालय से स्थानांतरण के विरुद्ध स्थगन प्राप्त किया था। न्यायालय के ताजा फैसले के बाद अब उनका पुराना स्थानांतरण आदेश स्वतः बहाल हो गया है। नियमानुसार, स्टे हटने के बाद संबंधित अधिकारी को वर्तमान पद पर बने रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं रह जाता है।
विवादों से रहा है पुराना नाता जिला आबकारी अधिकारी अनिल जैन अपने कार्यकाल के दौरान शराब ठेकेदारों को अनैतिक लाभ पहुँचाने और विभागीय अनियमितताओं के आरोपों के कारण लगातार सुर्खियों में रहे हैं। एडवोकेट बी.के. माला ने आयुक्त से मांग की है कि चूंकि अब कोई न्यायिक बाधा शेष नहीं है, इसलिए प्रशासन को अविलंब कार्रवाई करते हुए उन्हें रीवा जिले से कार्यमुक्त कर देना चाहिए।
इस घटनाक्रम के बाद आबकारी विभाग और प्रशासनिक हलकों में खलबली मची हुई है। अब सबकी नजरें रीवा संभाग आयुक्त के निर्णय पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या वैधानिक कदम उठाते हैं।
