![]() |
| शासकीय भूमि पर निर्माण को लेकर विवाद: ग्रामीणों की आपत्ति पर नायब तहसीलदार ने कराया स्थल निरीक्षण Aajtak24 News |
रीवा - मनगवां तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत रक्सा माजन में शासकीय एवं संस्था की भूमि पर प्रस्तावित निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की संस्था द्वारा उक्त भूमि पर पंचायत भवन निर्माण की तैयारी के विरोध में ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज कराते हुए नायब तहसीलदार न्यायालय से स्थगन (स्टे) आदेश प्राप्त किया था। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित हल्का पटवारी रक्सा माजन द्वारा प्रकरण में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने में विलंब किया जा रहा था, जिससे स्थिति और संवेदनशील होती जा रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए नायब तहसीलदार अजय मिश्रा ने स्वयं मौके पर पहुंचकर राजस्व अमले के साथ स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पटवारी रक्सा माजन, पटवारी बास, स्थानीय सरपंच तथा शिकायतकर्ता पक्ष उपस्थित रहे। अधिकारी ने पूर्व हस्तलिखित खसरे में दर्ज आवंटित भूमि का अवलोकन करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि जब तक प्रकरण में अंतिम निर्णय न हो जाए, तब तक संबंधित भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य न किया जाए। सरपंच को भी सख्त हिदायत दी गई कि न्यायालयीन प्रक्रिया पूर्ण होने से पहले किसी प्रकार की गतिविधि न की जाए।
आम रास्ते और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्त रुख
निरीक्षण के दौरान नायब तहसीलदार ने स्पष्ट कहा कि शासकीय आम रास्तों, संस्था की भूमि तथा अन्य सार्वजनिक संपत्तियों पर किसी भी व्यक्ति द्वारा अतिक्रमण या अवैध कब्जे का प्रयास किया गया तो उसके विरुद्ध कानून एवं नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राजस्व अमले को भी निर्देशित किया कि प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर यथाशीघ्र प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए।
ग्रामीणों में चर्चा, सरपंच पर लगाए आरोप
दूसरी ओर गांव में यह चर्चा भी जोरों पर है कि सरपंच कथित रूप से यह कह रहे हैं कि “पंचायत भवन उसी स्थान पर बनेगा, चाहे कितनी भी सेवा शुल्क लग जाए।” हालांकि इस कथन की कोई अधिकृत या प्रमाणित पुष्टि नहीं हो सकी है। इसे ग्राम माल के कुछ लोगों की आपसी चर्चा के रूप में देखा जा रहा है।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नहीं उठे प्रश्न
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की छवि ईमानदार, स्वच्छ और निष्ठापूर्ण रही है। मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करना और निर्माण पर रोक लगाना इस बात का प्रमाण है कि राजस्व विभाग मामले को गंभीरता से ले रहा है। फिलहाल अंतिम निर्णय न्यायालयीन प्रक्रिया एवं राजस्व अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा। मामले को लेकर क्षेत्र में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और ग्रामीण प्रशासन से निष्पक्ष एवं पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।
