रीवा-सीधी नेशनल हाईवे पर आदिवासियों का चक्काजाम: अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर भड़का आक्रोश Aajtak24 News

रीवा-सीधी नेशनल हाईवे पर आदिवासियों का चक्काजाम: अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर भड़का आक्रोश Aajtak24 News

रीवा -  रीवा-सीधी राष्ट्रीय राजमार्ग-39 पर सोमवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब ग्राम पंचायत पुरास के दर्जनों हरिजन और आदिवासी परिवारों ने सड़क पर उतरकर जाम लगा दिया। यह विरोध प्रदर्शन शासकीय तालाब से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और जमीन आवंटन में हो रही कथित धांधली को लेकर था। चक्काजाम के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

हाईकोर्ट के आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध

मिली जानकारी के अनुसार, जबलपुर उच्च न्यायालय ने ग्राम पंचायत पुरास के शासकीय तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश जारी किया था। जिला प्रशासन के निर्देश पर गुढ़ तहसील की राजस्व टीम पिछले दो दिनों से तालाब क्षेत्र में कार्रवाई कर रही थी। सोमवार को जब प्रशासन का दस्ता हरिजन बस्ती को खाली कराने पहुँचा, तो स्थानीय ग्रामीण आक्रोशित हो उठे और नेशनल हाईवे पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

सरपंच और राजस्व विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप

प्रदर्शनकारियों का सीधा आरोप है कि राजस्व विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधि मिलकर जमीन का बड़ा घोटाला कर रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि:

  • सरपंच का कब्जा: वर्तमान सरपंच रामभजन साकेत ने मध्य प्रदेश शासन की कीमती जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है, जिसे प्रशासन हटाने की हिम्मत नहीं दिखा रहा है।

  • हवा-हवाई आवंटन: पूर्व सरपंच और पटवारी अंगद द्वारा पूर्व में शासकीय भूमि को कागजों पर 'आवास' लिखकर आवंटित कर दिया गया था, लेकिन अब राजस्व रिकॉर्ड से वे दस्तावेज ही गायब बताए जा रहे हैं।

  • विवादित भूमि का आवंटन: नायब तहसीलदार जब मौके पर पहुँचीं, तो उन्होंने कुछ लोगों को जमीन आवंटित करने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि जिस जमीन को आवंटित किया जा रहा है, उसका मामला पहले से ही हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

प्रशासनिक समझाइश के बाद खुला जाम

घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे। ग्रामीणों की मांग है कि सबसे पहले सरपंच द्वारा कब्जा की गई पूरी शासकीय भूमि को खाली कराया जाए और उसके बाद ही भूमिहीन परिवारों को पारदर्शी तरीके से आवास हेतु जगह आवंटित की जाए। अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच और उचित आवंटन का आश्वासन दिए जाने के बाद ही ग्रामीणों ने जाम हटाया और यातायात बहाल हो सका।

उठते सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने रीवा प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या राजस्व विभाग के अधिकारी जानबूझकर रसूखदारों के कब्जे को नजरअंदाज कर रहे हैं? रिकॉर्ड गायब होने की कहानी कहीं भ्रष्टाचार को दबाने की साजिश तो नहीं? ग्रामीण अब इस मामले में जिला कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।



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