मऊगंज में 'मूसा गैंग' पर सियासी संग्राम: संतोष तिवारी ने खोला विधायक के खिलाफ मोर्चा Aajtak24 News

मऊगंज में 'मूसा गैंग' पर सियासी संग्राम: संतोष तिवारी ने खोला विधायक के खिलाफ मोर्चा Aajtak24 News

मऊगंज - मऊगंज जिले में पिछले कुछ समय से चर्चा का विषय बने कथित “मूसा गैंग” के अस्तित्व पर अब सवाल उठने लगे हैं। यह विवाद उस समय और गहरा गया जब भाजपा विधायक प्रदीप पटेल के करीबी माने जाने वाले संतोष तिवारी ने खुद प्रशासन के पास पहुंचकर इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर दी। संतोष तिवारी ने न केवल विधायक के दावों को चुनौती दी है, बल्कि जिले में जानबूझकर भय का माहौल बनाने का आरोप भी लगाया है।


कलेक्ट्रेट में शक्ति प्रदर्शन और ज्ञापन

गुरुवार की शाम मऊगंज कलेक्ट्रेट में उस समय गहमागहमी बढ़ गई जब संतोष तिवारी अपने समर्थकों के साथ पुलिस अधीक्षक (SP) दिलीप सोनी और कलेक्टर संजय कुमार जैन को ज्ञापन सौंपने पहुंचे। तिवारी ने प्रशासन से दो-टूक शब्दों में कहा कि “मूसा गैंग” के नाम पर जिले की छवि खराब की जा रही है। उन्होंने मांग की कि यदि वास्तव में ऐसा कोई गैंग सक्रिय है, तो पुलिस उसकी कुंडली खंगाले और कठोर कार्रवाई करे। लेकिन यदि यह सिर्फ एक कल्पना है, तो बार-बार इसका नाम लेकर जनता के बीच भ्रम और डर पैदा करना बंद होना चाहिए।

विधायक पर तीखे प्रहार: "अपनी सरकार में डर कैसा?"

पत्रकारों से चर्चा के दौरान संतोष तिवारी का लहजा काफी तल्ख रहा। उन्होंने सीधे तौर पर क्षेत्रीय विधायक प्रदीप पटेल के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा की मजबूत सरकार है और विधायक को पर्याप्त सुरक्षा कवच प्राप्त है। इसके बावजूद, विधायक द्वारा लगातार सुरक्षा और डर की बात करना समझ से परे है। तिवारी ने आरोप लगाया कि "मूसा गैंग" के नाम पर फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं और इसे केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दा बनाया जा रहा है।

पुलिस जांच और पुराने दावों का हवाला

संतोष तिवारी ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए पुराने रिकॉर्ड का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी उनका नाम इस कथित गैंग से जोड़ने की कोशिश की गई थी, लेकिन तब पुलिस प्रशासन की जांच में ऐसे किसी भी संगठित गिरोह (गैंग) के अस्तित्व से साफ इनकार किया गया था। तिवारी ने सवाल उठाया कि जब पुलिस की फाइलों में कोई "मूसा गैंग" है ही नहीं, तो फिर बार-बार यह नाम किसके इशारे पर उछाला जा रहा है?

दूध का दूध और पानी का पानी हो

तिवारी ने प्रशासन से अपील की है कि यदि विधायक द्वारा किसी चोरी या आपराधिक घटना का खुलासा किया गया है, तो उसकी बारीकी से जांच हो। उन्होंने कहा:

"अगर आरोप सही हैं, तो दोषियों को जेल भेजो। लेकिन अगर ये आरोप झूठे और मनगढ़ंत साबित होते हैं, तो झूठी शिकायत करने वालों और जनता को गुमराह करने वालों पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।"

तिवारी ने जहां एक ओर विधायक को घेरा, वहीं दूसरी ओर मऊगंज पुलिस द्वारा नशे के सौदागरों और अपराधियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई की जमकर सराहना की।

जनता में चर्चा: हकीकत या सियासत?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद मऊगंज की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक केवल एक ही चर्चा है— क्या "मूसा गैंग" सच में है? स्थानीय लोग अब असमंजस में हैं कि यह वाकई कोई आपराधिक खतरा है या फिर आगामी चुनाव और क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई के लिए बुना गया एक राजनीतिक ताना-बाना। प्रशासन के लिए अब यह चुनौती बन गई है कि वे इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें। अब सभी की नजरें एसपी और कलेक्टर की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या प्रशासन इस गैंग के होने की पुष्टि करेगा, या फिर संतोष तिवारी के आरोपों के बाद इस पूरे "मूसा गैंग" थ्योरी की हवा निकल जाएगी?



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