मऊगंज और रीवा में धान खरीदी बेपटरी: 3.50 लाख क्विंटल धान खुले में, करोड़ों का भुगतान अटका Aajtak24 News

मऊगंज और रीवा में धान खरीदी बेपटरी: 3.50 लाख क्विंटल धान खुले में, करोड़ों का भुगतान अटका Aajtak24 News

मऊगंज/रीवा - नवगठित मऊगंज और रीवा जिले में इस वर्ष धान खरीदी व्यवस्था भ्रष्टाचार और प्रशासनिक नाकामी की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जिले के 32 से अधिक उपार्जन केंद्रों पर हालात इतने बदतर हैं कि किसानों की मेहनत की उपज खुले आसमान के नीचे बर्बाद हो रही है, जबकि भुगतान के लिए किसान दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

1. भंडारण में नाकामी: 3.50 लाख क्विंटल धान पर संकट

प्रशासनिक दावों के विपरीत, मऊगंज जिले के केंद्रों से धान का उठाव समय पर नहीं हो सका है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 3.50 लाख क्विंटल धान वर्तमान में केंद्रों पर ही जमा है। परिवहन के लिए पर्याप्त वाहन न होने और मिलर्स की सुस्ती के कारण धान का उठाव ठप पड़ा है। हालिया वर्षा और नमी के कारण खुले में रखी यह धान भीग रही है, जिससे इसकी गुणवत्ता खराब होने और वजन घटने का खतरा बढ़ गया है। 

2. भुगतान का संकट: ₹82 करोड़ से अधिक की राशि लंबित

किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित ₹2369 प्रति क्विंटल (MSP) के हिसाब से भुगतान मिलना था। लेकिन उठाव न होने और बिलिंग में देरी के कारण मऊगंज के किसानों का अनुमानित 82.91 करोड़ रुपये का भुगतान अटक गया है। किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, जबकि शासन की ओर से भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश केवल कागजों तक सीमित दिख रहे हैं। 

कलेक्टर का रुख: मऊगंज कलेक्टर ने लापरवाही बरतने वाले प्रबंधकों और ट्रांसपोर्टरों पर कठोर कार्रवाई और रिकवरी के निर्देश दिए हैं। सरकार की जिम्मेदारी: विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि भीग रही धान की जिम्मेदारी तय की जाए और जिन अधिकारियों की निगरानी में यह धांधली हो रही है, उन पर FIR दर्ज की जाए।  किसानों की अपील: पीड़ित किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही धान का उठाव और लंबित भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।



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