गांधी मेमोरियल अस्पताल के गायनिक ओटी में भीषण आग, मरीजों में मचा हड़कंप Aajtak24 News

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रीवा - रविवार सुबह रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग (गायनिक) ऑपरेशन थिएटर में अचानक शॉर्ट सर्किट से भड़की आग ने कुछ ही पलों में विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटों के साथ पूरे अस्पताल परिसर में घना धुआँ फैल गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों और चिकित्सकीय स्टाफ ने तत्काल मोर्चा संभाला और पीडियाट्रिक, गायनिक तथा नाक-कान-गला (ईएनटी) विभाग में भर्ती बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित रूप से संजय गांधी अस्पताल के विभिन्न वार्डों में शिफ्ट किया। आगजनी की सूचना मिलते ही नगर निगम के दो दमकल वाहन और अमहिया थाने की पुलिस मौके पर पहुँची। एहतियातन ओटी के आसपास के सभी रास्तों को सील कर दिया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, हालांकि ओटी में हुए नुकसान का आकलन देर शाम तक नहीं हो सका।

फायर एनओसी पर बड़ा सवाल

गौरतलब है कि श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संजय गांधी अस्पताल सुपर स्पेशलिटी और गांधी मेमोरियल अस्पताल सहित कई संस्थानों को आवश्यक अग्नि सुरक्षा मानकों के अभाव में नगर निगम द्वारा फायर एनओसी जारी नहीं की गई है। निगम आयुक्त ने पूर्व में अस्पताल प्रबंधन को आगाह करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी थी कि आगजनी की किसी भी घटना की जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। इसके बावजूद अस्पतालों में कई जगह लगे फायर सिलेंडर एक्सपायर पाए गए हैं, जिन्हें समय रहते बदले नहीं जाने का आरोप है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि अग्नि सुरक्षा के लिए फायर टेक कंपनी को ठेका दिया गया है और उसी के कर्मचारियों ने समय रहते आग पर काबू पा लिया। वहीं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दमकल वाहन भी मौके पर मौजूद थे और राहत कार्य में जुटे रहे।

डीन का पक्ष

श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. सुनील अग्रवाल ने बताया कि अग्नि सुरक्षा से संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि फायर टेक कंपनी की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया। हालांकि यह सवाल अब भी अनुत्तरित है कि नगर निगम के नॉर्म्स कब पूरे होंगे और शासन स्तर पर प्रस्ताव को कब मंजूरी मिलेगी।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखा सवाल

यह पूरा घटनाक्रम प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला का गृह विधानसभा क्षेत्र रीवा है, और उनके निवास के समीप स्थित संजय गांधी जैसे बड़े अस्पताल में इस तरह की लापरवाही का सामने आना चिंताजनक है। पूर्व में भी उपचार के दौरान मौतों और आगजनी जैसी घटनाओं पर जांच के आदेश दिए गए, लेकिन जांच का निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुआ। छोटे और मध्यम मीडिया समूहों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन पारदर्शिता नहीं बरतता और समय पर सामूहिक प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की जाती, जिससे सच्चाई सामने लाने में कठिनाइयाँ आती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते अग्नि सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो भविष्य में यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। गायनिक ओटी में आग और इससे पहले सामने आई 11 माह की मासूम बच्ची से जुड़े मामलों ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता की अपेक्षा है कि शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर ठोस कदम उठाएँ, ताकि स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।




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