नवरात्रि की अष्टमी-नवमी पर करें हवन और कन्या पूजन: जानें शुभ मुहूर्त, संपूर्ण विधि और सामग्री लिस्ट Aajtak24 News

 नवरात्रि की अष्टमी-नवमी पर करें हवन और कन्या पूजन: जानें शुभ मुहूर्त, संपूर्ण विधि और सामग्री लिस्ट Aajtak24 News

शारदीय नवरात्रि माँ दुर्गा की उपासना का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में अष्टमी (30 सितंबर, मंगलवार) और नवमी (1 अक्टूबर, बुधवार) तिथि का विशेष महत्व होता है। इन दोनों ही तिथियों पर विशेष रूप से हवन (होम) और कन्या पूजन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अष्टमी और नवमी पर किया गया हवन माँ दुर्गा को अत्यंत प्रिय है और इससे दोगुना फल मिलने की मान्यता है।

हवन का महत्व और सामग्री

हवन का धार्मिक महत्व केवल अग्नि में आहुति देना भर नहीं है; इसे सद्भाव, श्रद्धा और शुद्ध विचारों के साथ करना आवश्यक है। हवन के दौरान नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है, घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

हवन सामग्री की लिस्ट
हवन कुंड, आम की लकड़ी, देसी घी, सूखा नारियलपान के पत्ते, सुपारी, कपूर, लाल कपड़ा, गंगाजल
कलावा, आम के पत्ते, लोबान, गुग्गल, जौ, काले तिलचावल, शहद, लौंग, सूखी लकड़ियां, फल व मिष्ठान 

हवन विधि: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। हवन कुंड स्थापित कर कलावा बांधें। आम की लकड़ी और घी/कपूर से अग्नि प्रज्वलित करें। तीन बार आचमन करें। "ॐ श्री गणेशाय नमः स्वाहा" और "ॐ दुं दुर्गायै नमः स्वाहा" जैसे दुर्गा मंत्रों के साथ घी, चावल, तिल आदि की आहुति दें। अंत में आरती कर पूर्णाहुति दें और प्रसाद बांटें। हवन के दौरान मन को शांत रखें और सकारात्मक विचार लाएं।

कन्या पूजन के श्रेष्ठ मुहूर्त और राहुकाल

नवरात्रि के नौ दिनों में अष्टमी और नवमी पर कन्याओं का माँ स्वरूप में पूजन करके उन्हें भोजन कराना बहुत शुभ होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष कन्या पूजन के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त और त्याज्य राहुकाल का समय नीचे दिया गया है:

पूजन तिथितिथि का दिनकन्या पूजन के श्रेष्ठ मुहूर्तराहुकाल (इस समय पूजन न करें)
दुर्गा अष्टमी30 सितंबर (मंगलवार)सुबह 9:00 से 12:00 बजे तक (चर और लाभ चौघड़िया)दोपहर 3:09 बजे से शाम 4:39 बजे तक
महानवमी1 अक्टूबर (बुधवार)सुबह 6:13 से 9:11 बजे तक (लाभ और अमृत चौघड़िया)दोपहर 12:10 बजे से 1:38 बजे तक

ध्यान दें: अष्टमी तिथि 29 सितंबर शाम 4:31 बजे से शुरू होकर 30 सितंबर शाम 6 बजकर 6 मिनट तक रहेगी, इसलिए अष्टमी का कन्या पूजन 30 सितंबर को ही होगा। नवमी तिथि 30 सितंबर शाम 6:06 बजे से शुरू होकर 1 अक्टूबर शाम 7 बजे तक रहेगी, अतः नवमी का कन्या पूजन 1 अक्टूबर को होगा।

कन्या पूजन के नियम:

  • 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं का पूजन करना चाहिए।

  • 9 कन्याओं के साथ एक बालक (बटुक भैरव) का पूजन भी शुभ माना जाता है।

  • पूजन में कन्याओं को भोजन (हलवा, पूरी, चना) कराने के बाद उपहार और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लेना चाहिए।

  • संधि पूजन (अष्टमी और नवमी के संधिकाल) का भी विशेष लाभ बताया गया है।

नवरात्रि के व्रती अष्टमी या नवमी तिथि पर हवन और कन्या पूजन कर माँ दुर्गा की कृपा से अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि ला सकते हैं।

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