रीवा में 'कचरा' का कोहराम: खुले ट्रकों से प्रयागराज का कूड़ा ढोया जा रहा, 'स्वच्छ भारत' पर सवाल Aajtak24 News

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रीवा/मध्य प्रदेश - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वच्छ भारत' अभियान को पलीता लगाते हुए एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से रीवा के पहाड़िया गाँव स्थित प्लांट तक गीला और सूखा कचरा खुलेआम ढोया जा रहा है। यह कचरा खुले 14 हाईवा वाहनों में लाया जा रहा है, जिससे रास्ते भर चाकघाट से लेकर रायपुर और पहाड़िया प्लांट तक के यात्री, स्थानीय लोग और होटल-ढाबा संचालक इसकी तीखी बदबू से त्रस्त हैं। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से जनजीवन पर गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।


वरिष्ठ अधिवक्ता और तहसील मंगावा के निवासी विनोद मिश्रा ने इस मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर वर्षों पहले तात्कालिक अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पी.एस. त्रिपाठी से शिकायत की गई थी, लेकिन आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वर्षों से यह सिलसिला बेरोकटोक जारी है, मानो जिला प्रशासन ने आँखें मूँद ली हों। यह स्थिति तब और भी चिंताजनक हो जाती है, जब एक तरफ केंद्र सरकार और राज्य सरकारें स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन की उदासीनता इस पूरे अभियान पर सवाल खड़ा करती है।


इस मामले में सबसे बड़ा संदेह स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जैसे विधायक और सांसदों की चुप्पी पर है। जनता का आरोप है कि इतने गंभीर मुद्दे पर भी वे कोई आवाज नहीं उठा रहे हैं। क्या उनकी यह चुप्पी किसी दबाव का नतीजा है या फिर वे जनता की समस्याओं के प्रति पूरी तरह उदासीन हो चुके हैं? खुले ट्रकों से कचरा परिवहन न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि इससे फैलने वाली बदबू और गंदगी संक्रामक रोगों का कारण बन सकती है। यह नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ एक गंभीर खिलवाड़ है।


इस मामले पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। जिला प्रशासन को तुरंत इन खुले वाहनों पर रोक लगानी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कचरा परिवहन के लिए केवल ढके हुए और सुरक्षित वाहनों का ही उपयोग हो। इसके साथ ही, स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखनी चाहिए और जनता के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए। यह केवल स्वच्छता का नहीं, बल्कि आम जनता के जीवन और स्वास्थ्य का सवाल है।



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