परिवर्तिनी एकादशी 3 सितंबर को: दुर्लभ योगों में करें भगवान विष्णु की पूजा, मिलेगी विशेष कृपा Aajtak24 News

परिवर्तिनी एकादशी 3 सितंबर को: दुर्लभ योगों में करें भगवान विष्णु की पूजा, मिलेगी विशेष कृपा Aajtak24 News

नई दिल्ली - हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यदायी माना जाता है, और भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व है, जिसे परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल यह पावन तिथि 3 सितंबर 2025 को पड़ रही है, जो कई दुर्लभ और शुभ योगों के साथ आ रही है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

परिवर्तिनी एकादशी का महत्व

यह एकादशी भगवान विष्णु के वामन अवतार को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा में करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने और भगवान की पूजा करने से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। जो लोग इस व्रत को पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करते हैं, उन्हें अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है।

शुभ योग और मुहूर्त

इस साल परिवर्तिनी एकादशी पर आयुष्मान, सौभाग्य और रवि योग जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जो इस दिन को और भी अधिक फलदायी बना रहे हैं। इन शुभ योगों में की गई पूजा और दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है।

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 3 सितंबर 2025, सुबह 03:53 बजे

  • एकादशी तिथि समाप्त: 4 सितंबर 2025, सुबह 04:21 बजे

  • व्रत पारण का समय: 4 सितंबर 2025, दोपहर 01:36 बजे से 04:07 बजे तक। पारण से पहले हरि वासर का समय 10:18 AM तक समाप्त हो जाएगा।

पूजा विधि और सामग्री

एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके एक चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

  • संकल्प: पूजा शुरू करने से पहले व्रत का संकल्प लें।

  • अभिषेक: भगवान विष्णु का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से अभिषेक करें।

  • अर्पण: भगवान को पीले रंग के वस्त्र, चंदन, हल्दी, अक्षत, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें। ध्यान रहे कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु का भोग अधूरा माना जाता है।

  • भोग: सात्विक चीजों जैसे फल, मिठाई और मेवे का भोग लगाएं।

  • आरती: भगवान की आरती करें और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।

इस पावन दिन पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी करनी चाहिए, क्योंकि उनकी पूजा से धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। व्रत के दौरान केवल फलाहार ही ग्रहण करें और सात्विक भोजन ही करें। अगले दिन व्रत का पारण शुभ मुहूर्त में ही करें। इस दिन पूजा में आप श्री विष्णु जी का चित्र, पुष्प, नारियल, सुपारी, फल, लौंग, धूप, दीप, घी, पंचामृत, अक्षत, तुलसी दल, चंदन, और मिष्ठान जैसी सामग्री का उपयोग कर सकते हैं। यह दिन भक्ति और समर्पण का होता है, इसलिए भगवान के नाम का स्मरण करते हुए अपना समय व्यतीत करें।

Post a Comment

Previous Post Next Post