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| एमएसपी की गारंटी की मांग को लेकर फिर जंतर-मंतर पर जुटे किसान, क्या है इस बार का एजेंडा? Aajtak24 News |
नई दिल्ली - देश भर के किसान एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर राजधानी दिल्ली में एकजुट हो रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले सोमवार को जंतर-मंतर पर एक किसान महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें देश के अलग-अलग राज्यों से किसान बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। यह महापंचायत 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के लगभग चार साल बाद हो रही है।
प्रमुख मांगें और एजेंडा
इस महापंचायत का मुख्य एजेंडा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी है। किसान संगठनों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों को निरस्त करते समय एमएसपी पर कानून बनाने का जो वादा किया था, उसे अभी तक पूरा नहीं किया है। इसके अलावा, किसानों की अन्य प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
कृषि क्षेत्र का संरक्षण: अमेरिका के साथ होने वाले किसी भी व्यापार समझौते से कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और मत्स्य पालन क्षेत्रों को बाहर रखा जाए।
पुलिस केसों की वापसी: कृषि कानूनों के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज किए गए सभी पुलिस मामलों को वापस लिया जाए।
संयुक्त किसान मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यह महापंचायत पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहेगी।
पिछला आंदोलन और मौजूदा स्थिति
यह महापंचायत उस ऐतिहासिक आंदोलन की याद दिलाती है, जब हजारों किसानों ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर महीनों तक डेरा डाला था। केंद्र सरकार द्वारा कानूनों को वापस लिए जाने के बाद वह आंदोलन समाप्त हुआ था, लेकिन एमएसपी गारंटी और अन्य मांगों पर गतिरोध बना रहा। हाल ही में, पंजाब और हरियाणा के किसानों ने एमएसपी को लेकर फिर से दिल्ली कूच करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें शंभू और खनौरी बॉर्डर पर रोक दिया गया। इस दौरान किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने लंबे समय तक अनशन किया। इन गतिरोधों के बावजूद, एमएसपी की गारंटी पर सरकार और किसानों के बीच कोई स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई है।
कानून-व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
दिल्ली में किसान महापंचायत के मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, लगभग 1,200 पुलिसकर्मियों को जंतर-मंतर पर तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके और कानून-व्यवस्था बनी रहे। इससे पहले, किसानों के दिल्ली कूच के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे ब्लॉक करने पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि हाईवे देश की जीवन रेखा हैं और उन्हें ब्लॉक नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कुछ लोगों के राजनीतिक एजेंडे होने की बात भी कही थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की तारीफ करते हुए उन्हें 'सच्चा किसान' बताया था। किसान नेताओं का कहना है कि वे इस बार अपनी मांगों को मनवाने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से सरकार पर दबाव बनाएंगे, ताकि एमएसपी की कानूनी गारंटी का उनका सपना पूरा हो सके।
