कलेक्टर का आदेश भी बेअसर
रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन कलेक्टर ने गढ़ उप-तहसील को नियमित रूप से खोलने का आदेश दिया था। शुरुआत में, कार्यालय कुछ दिनों तक खुला भी रहा, लेकिन नई पदस्थापना होने के बाद एक बार फिर यहाँ ताले लटक गए हैं। यह तय किया गया था कि उप-तहसील सप्ताह में तीन दिन—सोमवार, बुधवार और शुक्रवार—खुली रहेगी, लेकिन अब वह भी बंद है।
अधिवक्ता संघ और ग्रामीणों में गहरा रोष
गढ़ उप-तहसील के बंद होने से न्याय प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है। अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रभात चंद्र द्विवेदी और वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद मिश्रा ने इस स्थिति पर रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को सुनवाई के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उप-तहसील का निर्माण न्याय को आसान बनाने के लिए हुआ था, लेकिन अब स्थिति पहले से भी बदतर हो गई है। लंबित मामलों के कारण लोगों को महीनों तक इंतज़ार करना पड़ रहा है, जिससे न्याय मिलने की उम्मीद धूमिल हो रही है।
वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों और अधिवक्ताओं ने अब वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अगर गढ़ उप-तहसील को नियमित रूप से नहीं खोला गया, तो न्याय से वंचित होने के साथ ही प्रशासन की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे। लोग चाहते हैं कि जल्द से जल्द इस अव्यवस्था को सुधारा जाए ताकि उन्हें न्याय के लिए भटकना न पड़े।