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| खराब सड़कों के पेचवर्क पर करोड़ों खर्च, नगर निगम में शिकायत सुनने वाला कोई नहीं |
स्ट्रीट लाइट सुधार के संसाधन ही नहीं
नगर निगम की अव्यवस्थाओं की पोल यह तथ्य खोलता है कि शहर के 22 झोनल कार्यालयों में स्ट्रीट लाइट मेंटिनेंस के संसाधनों का भारी अभाव है। एक झोन में केवल एक वाहन होने के कारण कई शिकायतें लंबित ही रह जाती हैं। स्ट्रीट लाइट सुधार के लिए भी पर्याप्त हाइड्रोलिक मशीनें नहीं हैं और कई जगह एलईडी लाइट लगाने का काम भी अब तक अधूरा पड़ा। नगर निगम का दावा है कि शिकायत मिलते ही कार्यवाही होती है, लेकिन महापौर एप 311 और सीएम हेल्पलाइन 181 पर दर्ज अनेक शिकायतें महीनों से अनसुलझी पड़ी हैं। आश्चर्य इस बात का कि नए व्हाट्सअप नंबर पर तो कोई सुनवाई नहीं हो रही और न कोई जवाबदेह है।
समस्या को नए इंजीनियर और गंभीर बना रहे हैं। अधिकांश इंजीनियरों को क्षेत्र की जानकारी नहीं है और न अनुभव। नागरिकों का कहना है कि कई इंजीनियर फोन तक रिसीव नहीं करते, जिससे शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती। बरसात के मौसम में कॉलोनियों और बस्तियों में जहरीले जीव-जंतुओं के घुसने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में स्ट्रीट लाइट बंद रहने से खतरा दोगुना हो गया है। मुख्य मार्गों से लेकर गली-मोहल्लों तक अंधेरा पसरा रहता है, जिससे नागरिकों की परेशानियां बढ़ रही हैं। लोगों का कहना है कि निगम प्रशासन को सड़कों की गुणवत्ता सुधारने और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था दुरुस्त करने के ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि बारिश में उनकी समस्याएं कम हो सकें।
शिकायत सुनने वाला कोई नहीं
इसके अलावा सबसे ज्यादा जरूरत '311 एप्प' पर मिल रही शिकायतों की है। ऑटोमेटिक शिकायतें दर्ज हो रही है और उनके क्रमांक भी आ रहे। पर शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। जबकि, महापौर की अपनी 3 साल की उपलब्धियां की गिनती ही खत्म नहीं हो रही। पर, उससे ज्यादा व्यवस्था में खामियां गिनाई जा सकती है।

