रीवा मऊगंज जिले के सनातन धर्म के आस्था का केंद्र kendra Aajtak24 News

 

रीवा मऊगंज जिले के सनातन धर्म के आस्था का केंद्र kendra Aajtak24 News 

रीवा - जंगल में ज्वाला रूप में प्रगट हुई अष्टभुजी माता रीवा जिले वर्तमान मऊगंज अंतर्गत स्थित अष्टभुजी धाम नईगढी पथरोडा गांव के अंतर्गत नईगढी जनपद क्षेत्र के नगर पंचायत नईगढी के वार्ड क्रमांक 12 में स्थित है जो की रीवा मऊगंज जिले के सनातन धर्म के आस्था का केंद्र है इसी प्रकार अष्टभुजी माता मंदिर के दक्षिण 15 km दूर विश्वकर्मा द्वारा निर्मित शिव मंदिर है आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व पथरोडा गांव के जंगल में आग लगी हुई दिखी जहां तात्कालिक राजा के वंशजों ने देखा कि जंगल में आग लग गई है पानी डाल दिया गया आज बुझ गई उस अनहोनी में तात्कालिक व्यक्ति की मृत्यु हो गई इस समय वर्तमान अष्टभुजी धाम मंदिर के पास राजा का किला निर्माणाधीन था जो किला दिनभर बनता था और रात को गिर जाता था माता अष्टभुजी ने तात्कालिक राजा को स्वप्न दिया कि यहां किले का निर्माण मत करो क्योंकि यहां यदि बस्ती बस जाएगी तो गंदगी होगी मैं अष्टभुजी माता प्रकट हो रही थी तो पानी डाल दिया गया है राजा स्वप्न में ही प्रश्न किया कि आखिर मैं घर कहां बनाऊं स्वप्न में ही माता अष्टभुजी ने बताया कि एक खरगोश कल दिखेगा कुत्ता पकडने जायेगा जहां खरगोश भागते भागते विलुप्त हो जाएगा उसी जगह आप किले का निर्माण करना राजा ने यही कार्य किया अष्टभुजी धाम मंदिर में वर्ष में प्रमुख रूप से चैत्र नवरात्र, नवदुर्गा में श्रद्धालु दर्शन करने हेतु आते हैं जिसमें चैत्र रामनवमी नवदुर्गा दो गुप्त रामनवमी इसी के साथ सोमवार और गुरुवार श्रद्धालु काफी आते हैं यहां पर मुंडन कनछेदन विवाह कथा या अन्य श्रद्धालु जो माता से श्रद्धा पूर्वक याचना करते हैं उनकी याचना पूर्ति होने पर कथा या जीवित बकरे की बालि का विधान है साथ ही मनुष्य अपनी जीभ काट कर भी माता के चरणों में अर्पित करते हैं जिंदा बकरे को मां के पास ले जाया जाता है और अक्षत छिलकाते ही बकरा बेहोश होकर गिर जाता है फिर इसके बाद पुनः जब जल छिड़का जाता है तो बकरा उठकर बैठ जाता है राजा छत्रपति को इस घने जंगल में भीलों के राजा कहा जाता है जिन्हें वर्तमान में सेंगर राजघराना भी कहते हैं किंतु इन बातों की पुष्टि नहीं होती जबकि राजा सेंगर राजपूत में माने जाते थे और जब कभी भी किसी भी राज्य में संकट होता था तो उन सैनिकों के आगे यह माना जाता था कि माता अष्टभुजी आगे-आगे चलती हैं और हमेशा विजय दिलाती हैं इस संबंध में चर्चा करते हुए बड़े महाराज मुख्य पुजारी जयप्रकाश नारायण पाण्डेय द्वारा बताया गया कि यहां पर काफी श्रद्धालु आते हैं और धीरे-धीरे विकास की गति बढ़ाते बढ़ाते 5 अन्य मंदिर बन गए हैं यहां पर घना जंगल था वर्तमान समय पर वीरान हो गया है और जो वृक्ष भी आसपास लगे थे जनता के आस्था का केंद्र होने के कारण कई सैकड़ो दुकान है जिनके कारण वृक्ष नष्ट कर दिए गए हैं और चारों तरफ अतिक्रमण है श्रद्धालु यहां आते हैं यहां पंडितों को बैठने और पूजा के स्थान निर्धारित नहीं है वहीं दूसरी तरफ पानी का विशेष संकट निर्मित हो जाता है आज दिनांक 9 4.2024 से चैत्र नवरात्रि प्रारंभ हो गई है जो 17.4.2024 तक प्रारंभ रहेगी यह धर्मार्थ विभाग या राजस्व की निगरानी में नहीं है इसकी देखरेख वर्तमान समय पर नगर पंचायत नईगढी थाना नईगढी द्वारा की जाती है किंतु आज प्रथम दिन यहाँ व्यवस्था काफी नहीं दिखी मुख्य मंदिर में एक दरवाजा है जिसमें भीड़ लगने से काफी दुर्घटना की संभावना बनी रहती है यह क्षेत्र रीवा जिले से 50 किलोमीटर देवतालाब और देवतालाब से 15 किलोमीटर दूर उत्तर यह अष्टभुजी धाम मंदिर स्थित है इसी के समीपस्थ क्योंटी जलप्रपात 3 किलोमीटर दूर स्थित है इस मंदिर की देखरेख दर्जनों पुजारी द्वारा की जाती है यहां मानस के साथ अन्य श्रद्धालुओं द्वारा भक्ति भावपूर्वक पूजा अर्चना की जाती है यह रीवा जिले का विशेष  प्राचीनतम देवी मंदिर है वैसे भारत में हर जगह कहीं ना कहीं हर ग्राम में एक प्रचीनतम कुलदेवी माता का मंदिर होता है किंतु उन कुलदेवी माता के मंदिरों की स्थापना उनके पूर्वजों द्वारा की जाती है जबकि माता अष्टभुजी स्वयं ज्वाला रूप पर प्रकट हुई और आज मंदिरों के रूप पर स्थापित हो चुकी है इसी के उत्तर नदी का प्रवाह होता है जो मार्च माह में ही वर्तमान समय पर सूख जाता है यह स्थान पत्थर युक्त है और जानकारो द्वारा बताया जाता है कि यहां लगभग 500 वर्षों से पूजा अर्चना की जा रही है।







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