श्रावण के दूसरे सोमवार के शुभ संयोग में मनाई गई सोमवती अमावस्या somti amavasya Aaj Tak 24 news

 

श्रावण के दूसरे सोमवार के शुभ संयोग में मनाई गई सोमवती अमावस्या somti amavasya Aaj Tak 24 news

शहडोल -  श्रावण मास में सोमवती अमावस्या एक दुर्लभ संयोग होता है जोकि शिव पूजन के लिए अति विशिष्ट माना गया है। आज अमावस्या तिथि संपूर्ण दिन रात विद्यमान रहते हुए संचरण करेगी तथा बृहस्पति का नक्षत्र पुनर्वसु तथा सर्वार्थ सिद्धि योग सोमवती अमावस्या के योग को और अधिक बलवान कर रहा है। श्रावण मास के सोमवार को शिव पूजन का विशेष महत्व माना गया है। श्रावण मास में भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु प्रत्येक सोमवार का फलाहार करते हुए व्रत रखकर बिल्वपत्र, पंचामृत, गंगाजल, दूध, अक्षत, पुष्प एवं फल आदि के साथ शिव पूजन करते हुए पंचाक्षरी मंत्र ओं के साथ भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। शास्त्रीय मान्यताएं हैं कि श्रावण सोमवार को श्रावण मास माहात्म्य तथा शिव पुराण का श्रवण एवं पठन करने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। वैसे तो सोमवती अमावस्या का ही हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व माना गया है लेकिन यदि श्रावण मास में सोमवती अमावस्या का सयोग बन जाए तो यह महायोग कहलाता है। विवाहित स्त्रियों द्वारा इस दिन अपने पति के दीर्घायु की कामना के लिए व्रत रखा जाता है। विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चंदन इत्यादि से पूजा करते हुए वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा करने से दांपत्य जीवन सुखद होता है तथा पति की सुख समृद्धि एवं आयु में वृद्धि होती है। सोमवती अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का भी विशेष महत्व है और ऐसी मान्यता है कि तीर्थ स्नान से हमारे पितरों को शांति प्राप्त होती है। आज सावन मास के दूसरे सोमवार के दिन सोमवती अमावस्या के सयोग में शिव के अभिषेक एवम पार्थिव शिवलिंग पूजन का भी शास्त्रों में बहुत अधिक महत्व बताया गया है। 4 जुलाई से प्रारंभ हुआ श्रावण मास शुद्ध श्रावण मास के रूप में संचरण कर रहा था लेकिन अमावस्या के दूसरे दिन से ही अर्थात 18 जुलाई मंगलवार से श्रावण अधिक मास की प्रतिपदा का प्रारंभ होगा। और यहीं से पुरुषोत्तम मास अथवा अधिक मास प्रारंभ हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष का श्रावण लगभग 59 दिनों का है जिसमें 28 दिन की अवधि पुरुषोत्तम मास की होगी। 16 अगस्त को श्रावण अधिक मास पूर्णिमा के साथ पुरुषोत्तम मास समाप्त होगा। इसके पश्चात 17 अगस्त से एक बार फिर शुद्ध श्रावण मास के शुक्ल पक्ष प्रारंभ होगा जो कि 30 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा रक्षाबंधन पर्व के साथ संपूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगा। ज्योतिर्विद राजेश साहनी के अनुसार श्रावण मास के आगामी दोनों पक्षों में संक्रांति का अभाव होने से श्रावण मास की वृद्धि अर्थात श्रावण अधिक मास घटित हुआ है। इस समय अवधि में विवाह, मुंडन, देव प्रतिष्ठा, गृह आरंभ, गृह प्रवेश, काम्य व्रत अनुष्ठान, नवीन आभूषण बनवाना तथा नया वाहन खरीदना इत्यादि वर्जित कहा गया है। परंतु किसी रोग या कष्ट की निवृत्ति हेतु किए जाने वाले अनुष्ठान, संतान के जन्म संबंधी कृत्य, गर्भाधान, पुंसवन जैसे संस्कार तथा पूर्व से प्रारंभ किए गए निर्माण कार्य किए जा सकते हैं। पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित है अतः इस समय अवधि में श्रावण मास के अधिपति भोलेनाथ के साथ भगवान विष्णु का भी नित्य पूजन करना चाहिए। अधिक मास की एकादशी पूर्णिमा आदि पर्व तिथियों पर भगवान विष्णु की विधि पूर्वक पूजा अर्चना व्रत स्नान दान तथा पुरुषोत्तम मास माहात्म्य का पठान एवं श्रवण करना चाहिए।

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