Panchayat Vikas ka roda bani mahila sarpanch ko hataya Aaj Tak 24 news

 


Panchayat Vikas ka roda bani mahila sarpanch ko hataya Aaj Tak 24 news 

शहडोल - नई ग्रामपंचायतों का गठन होने के बाद ग्रामपंचायत चापा में एक संघर्षपूर्ण माहौल निर्मित हो गया है। कारण है सरपंच उमा सिंह मार्को का स्वेच्छाचारी व हठधर्मी बर्ताव। जिसके कारण ग्रामीण व पंच परेशान हैं। ग्रामीण विकास का पहिया रुका पड़ा है। परेशान उपसरपंच व पंचों ने गत दिवस कलेक्टर से शिकायत कर सरपंच को पद पृथक करने की मांग की है। जिसमें उन्होने विन्दुवार सरपंच की करतूतों का हवाला दिया है। शासकीय कार्य व योजनाएं तो ठप्प हैं ही, लोगों के प्रमाण पत्र भी नहंीं बन पा रहे हैं। श्मशान घाट का संरक्षण नहीं शिकायत में लेख किया गया है कि पंचायत के अंदर एक श्मशान घाट ऐसा है जिसे दबंगों ने इधर उधर से दबा लिया था। उसे उपसरपंच व पंचो के प्रयास से खाली क राया गया और उसका सीमांकन कराया गया। यहां शव दाह सुविधा के लिए शेड निर्माण कराने व श्मशान को संरक्षण में लेने के लिए प्रस्ताव भी पारित है, लेकिन इसके बावजूद सरपंच इस प्रस्ताव के विरोध में है और श्मशान घाट के संरक्षण के लिए बाउण्ड्रीवाल कराने को तैयार नहीं है। उसके द्वारा निरंतर अड़ंगे लगाए जा रहे हैं। मनमाने प्रस्ताव बनवा रही सरपंच द्वारा सचिव पर दबाव बनाया जाता है और उसके द्वारा ग्रामपंचायत कार्रवाई रजिस्टर पर अपने निजी हितों वाले प्रस्तावों को दर्ज करा कर पंचायत कोष का दुरुपयोग किया जाता है। जो कि नियमविरुद्ध है, सरपंच द्वारा जनहित के कार्यों को तरजीह नहीं दी जाती है। इनके द्वारा पंचायत के विकास को दृष्टिगत रखते हुए विवेकपूर्ण निर्णय लिए जाने की बजाय हठधर्मिता का परिचय दिया जाता है। जिससे पंचायत के विकास कार्य अवरुद्ध हैं। खेल सामग्री देने से इंकार क्षेत्रीय खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देना ग्राम पंचायत की नैतिक जिम्मेदारी है, इसके लिए खिलाडिय़ों को खेल सामग्री व मैदान जैसे संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। लेकिन चापा सरपंच खेल प्रेेमी बच्चों को खेल सामग्री भी प्रदान करना उचित नहीं समझ रही है। पंचायत कोष में राशि होने के बावजूद खेल सामग्री देने को राजी नहीं है। पंचायत में खेलों का विकास रुका पड़ा है, जबकि यहां लोगों द्वारा स्वयं के प्रयास से एक भूमि का समतलीकरण कराकर बच्चों केा प्रदान किया गया है। प्रमाण पत्र के लिए पैसे की मांग ग्रामीणों को अगर जाति सत्यापन, निवास प्रमाण पत्र, सेजरा प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज बनवाना हो तो उन्हे बार बार भटकना पड़ता है। सरपंच उनकी समस्या से कोई सरोकार नहीं रखती है, वह कागज बनाने में और कागज में हस्ताक्षर करने से मना कर देती है इसके लिए वह पैसा चाहती है। ग्रामीणों से रकम वसूलने उसने दो गुर्गे पाल रखे हैं। एक तो महिला पंच है और दूसरा गांव का ही एक युवक है। इन दोनों के द्वारा ग्रामीणों से हर कार्य के लिए पैसा मांगा जाता है। जब ग्रामीण प्रमाण पत्र बनवाने आते हैं तो सरपंच उस तथाकथित युवक से मिलने को कह देती है। पेसा एक्ट के तहत खाताधारकों का खाता भी नहीं खुलवाया जा रहा है जबकि ग्राम सभा हुए महीनों बीत गए हैं। सरपंच की हठधर्मिता से ग्रामीण खाता नहीं खोल पा रहे हैं।

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