गुरु शरीर और प्राण है - अभय सुराणा | Guru sharir or pran hai

गुरु शरीर और प्राण है - अभय सुराणा

गुरु शरीर और प्राण है - अभय सुराणा

जावरा (यूसुफ अली बोहरा) - गुरु विराट हे, गुरु हे तो जीवन में ठाठ हे, गुरु ही हाथों की रेखा है और हमने गुरु को ही भगवान के रूप में देखा है ।गुरु वेद ग्रंथ पुराण है, गुरु शरीर और प्राण है ।गुरु है तो भव से बेड़ा पार है गुरु जगत की शान है ।गुरु ही सब की धुरी है,और उपाध्याय मुलमुनि जी माहरासाहब के लिए तो हर उपमा अधूरी है।

उक्त विचार अखिल भारतीय जैन दिवाकर उपाध्याय श्री मूलचंद जी महाराज का जन्म शताब्दी समारोह समिति एवं श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन दिवाकर श्रावक संघ कोटा के संयुक्त तत्वाधान में एवं उप प्रवर्तक तपस्वी रत्न अरुणमुनि जी महाराज साहब दिवाकर के दीवाने युवा सम्राट उप प्रवर्तक श्री राकेश मुनि जी महाराज साहब एवं उप प्रवर्तनी महासती रत्ना शांताकवरजी महाराज आदि ठाणा 3 के पावन सानिध्य में जिनशासन गौरव संथारा साधक वरिष्ठ उपाध्याय गुरुदेव श्री मूलचंदजी महाराज की100वी जन्म जयंती समारोह के समारोह के अवसर पर अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच के राष्ट्रीय संगठन मंत्री अभय सुराणा ने व्यक्त कीये ।आपने कहा कि गुरुदेव के प्रवचन फूलों की भांति थे आपने अपने प्रवचन में जिन शाश्वत सामाजिक एक कालजई विषय वस्तु से पर अपनी अमृतवाणी से हमें ज्ञान दिया आपका एक-एक शब्द हमारे लिए मुक्ति का स्त्रोत है।

वरिष्ठ उपाध्याय मूलचंद जी महाराज की जयंती के इस अवसर पर हैदराबाद बेंगलुरु मद्रास मुंबई-पुणे नीमच मंदसौर इंदौर जावरा कोटा दलोदा आदि कई जगह के श्रावक श्राविका उपस्थित थे। समारोह में स्थानीय संघ के पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय संगठन मंत्री अभय सुराणा का शाल ओढ़ाकर स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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