गुरु की सेवा कभी निष्फल नहीं जाती: मुनि पीयूषचन्द्रविजय | Guru ki seva kabhi nishfal nhi jati

गुरु की सेवा कभी निष्फल नहीं जाती: मुनि पीयूषचन्द्रविजय

गुरु की सेवा कभी निष्फल नहीं जाती: मुनि पीयूषचन्द्रविजय

राजगढ़/धार (संतोष जैन) - जो दृष्टि प्रभु दर्शन करें वह दृष्टि धन्य है । अषाढ़ी श्रावक ने अंतर की आंखों से प्रभु के दर्शन किये और अपना जीवन धन्य बनाया । हमारी जिव्हा भी उस वक्त धन्य हो जाती है जब हम प्रभु की स्तुति करते है । शास्त्रों में बताया है कि देवलोक 12 एवं नरक 7 होते है । असंख्य वर्षो तक श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ प्रभु की प्रतिमा को प्रथम देवलोक में देवों द्वारा रखा गया एवं उनकी पूजा भक्ति की गयी । सूर्यदेव देवलोक से यह प्रतिमा पाताललोक लेकर गये ओर वहां असंख्य वर्षो तक देवों द्वारा पूजा अर्चना और भक्ति की गयी । आदिनाथ प्रभु 83 लाख पूर्व की अवस्था तक राजपाठ के साथ संसार के सुखों में रहे । बाह्य सुन्दरता पर हमें ध्यान नहीं देना चाहिये । हमें अंतर की सुन्दरता का ध्यान रखना है । उक्त बात श्री राजेन्द्र भवन राजगढ़ में गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा. ने कही । आपने बतलाया कि एक बार गौतमस्वामीजी ने भी प्रभु महावीर के समवशरण में अपने ही केवली शिष्यों एवं आनन्द श्रावक को भी मिच्छामि दुक्कड़ं करके क्षमायाचना की थी । जब अहंकार के भाव आ जाते है उस वक्त इंसान को क्षमायाचना करके जीवन में आये इस विकार से मुक्ति प्राप्त कर लेना चाहिये । क्षमायाचना करने में कभी भी विलम्ब नहीं करना चाहिये । अपने हाथों से यदि कोई कार्य गलत हो जाये उस समय अपने दिल में दुःख उत्पन्न करके अफसोस करते हुये सामने वाले से क्षमा मांगकर स्वयं को हल्का कर लेना चाहिये । जैन दर्शन हमेशा यही कहता है कि जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है और जो होगा वह भी अच्छा ही होगा । यह सब हमारे कर्मो का फल है यह समझ कर स्वीकार कर लेना चाहिये । गुरु की सेवा कभी निष्फल नहीं जाती है । सेवा का फल हमेशा जीवन में किसी ना किसी रुप मंे इंसान को मिलता ही है । गुरु चरणों की सेवा से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है । धर्मसभा में मुनिराज श्री जिनचन्द्रविजयजी म.सा. भी उपस्थित थे ।

गुरु की सेवा कभी निष्फल नहीं जाती: मुनि पीयूषचन्द्रविजय

राजगढ़ श्रीसंघ में 9 अगस्त 2021 सोमवार को श्री गौतमस्वामीजी के खीर एकासने का आयोजन श्री अनिलकुमार मनोहरलालजी खजांची परिवार की ओर से रखा गया है । नमस्कार महामंत्र की आराधना मुनिश्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा. की निश्रा में 14 अगस्त से 22 अगस्त तक श्रीसंघ में करवायी जावेगी ।


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