साहित्य में हमारे समय का यथार्थ दर्ज होना चाहिए - सदाशिव कौतुक | Sahity main hamare samay ka yatharth darj hona chahiye

साहित्य में हमारे समय का यथार्थ दर्ज होना चाहिए - सदाशिव कौतुक

शगुन परिवार की काव्य गोष्ठी सम्पन्न

साहित्य में हमारे समय का यथार्थ दर्ज होना चाहिए - सदाशिव कौतुक

मनावर (पवन प्रजापत) - शगुन परिवार के साहित्यकारों ने बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजन कर मां के चरणों में काव्य सुमन अर्पित किए । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि साहित्यकार सदाशिव कौतुक इंदौर ने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्य की किसी भी विधा में हम जिस समय में जी रहे हैं उसका यथार्थ दर्ज होना चाहिए और इसके लिए हमें सामयिक पत्रिकाओं का अध्ययन करते रहना चाहिए । उन्होंने अपने काव्य पाठ में मत्तगयंद छंद की रचना सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया । लगभग साठ पुस्तकों के रचयिता कौतुक ने नव साहित्यकारों को उत्साहित करते हुए कुछ छंद मुक्त कविताएं भी सुनाई । कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बसंत जख्मी जी ने गीत,गजल, कविता की जानकारी देते हुए कहा कि सामयिक रचनाएं मंचीय कवियों के लिए अति आवश्यक होती है । 

साहित्य में हमारे समय का यथार्थ दर्ज होना चाहिए - सदाशिव कौतुक

अपने समय की रचना सुनाते हुए कहा कि है नहीं याचना यह तो रण की पाती है, सिंहासन से उठो राम सेना आती है । कहानीकार गोविंद सेन ने वर्तमान संग्रह प्रवृत्ति पर गजल में व्यंग्य कसते हुए कहा कि मुश्किल में ये जान बहुत है,घर छोटा सामान बहुत है । साहित्यकार संजय वर्मा दृष्टि ने भारत की महानता पर गीत सुनाते हुए कहा कि जन्नत है ज़मीं जिसकी और ऊंची शान है, दुनिया के हर नक्शे में मेरा भारत महान है । व्यंग्यकार विश्वदीप मिश्र ने वर्तमान किसान आंदोलन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राष्ट्र से बड़ा कोई धर्म नहीं सारे जाएं जान, तिरंगे का यूं अपमान नहीं सहेगा हिन्दुस्तान । युवा शायर कुलदीप पंड्या ने समाज में फैली असमानता पर अपनी गजल में कहा कि है गर अंधेरे तो सुनों उजाले हैं, महलों ने झोपड़ियों पर डाके डाले हैं । डॉ जगदीश चौहान ने युवाओं को जागृत करते हुए कहा कि चेतन हो  युवायों देश का यह भार तुम्हारे हाथों में , यलगार तुम्हारे हाथों में मिलनसार तुम्हारे हाथों में । कवियित्री दीपिका व्यास ने सरस्वती वंदना के साथ राम मंदिर पर सुंदर गीत सुना कर सबको मोहित कर दिया । युवा ओजकवि मंगलेश सोनी ने अपनी ओज रचना में कहा कि काश्मीर पर आघातों को और नहीं सह सकता मैं , कितना तूफां दिल में है तुमसे नहीं कह सकता मैं । प्रकाश वर्मा, संदीप जाजमे, शिवलाल मालवीय और क्षितीज व्यास ने अतिथियों का सम्मान शाल-श्रीफल से किया । कार्यक्रम संचालन राम शर्मा परिंदा ने और आभार राजा पाठक ने जताया ।



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