सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परासिया में कुष्ठ रोग मुक्त करने हेतु शपथ ली गई | Samudaik swasthya kendr parasiya main kusht rog mukt karne hetu shapath li gai

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परासिया में कुष्ठ रोग मुक्त करने हेतु शपथ ली गई

वीईई संजय मालवीय के द्वारा कुष्ठ रोग का इलाज का महत्व और कैसे रोकें

राष्ट्रीय पिता महात्मा गांधी पुण्यतिथि पर निकाली गई रैली

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परासिया में कुष्ठ रोग मुक्त करने हेतु शपथ ली गई

जुन्नारदेव (मनेश साहू) - राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परासिया में कुष्ठ रोग मुक्त करने हेतु शपथ ली गई एवं संकल्प रैली निकाली गई  बीएमओ डॉ सुधा बक्शी द्वारा शपथ स्टाफ एवं नागरिक बंधुओं को शपथ दिलाई गई।   

*बीएमओ डॉ सुधा एवं वी,ई,ई संजय मालवीय के द्वारा मिली जानकारी के अनुसार30 जनवरी से 13 फरवरी तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परासिया में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत कुष्ठ जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है इस दौरान बीपीएम अनूप साहू एनएम जगदीश एमटीएस रजनी साहू बीसी एम मनीष परसाई दया यादव इमरान माया एन एम ए उमाशंकर वर्मा  एवं एएनएम सहित स्टाफ उपस्थित थे *बीईई संजय मालवीय* के द्वारा बताया गया कि कुष्ठ रोग के संकेत व लक्षण।

 त्वचा पर घाव होना कुष्ठ रोग के प्राथमिक बाह्य संकेत हैं। यदि इसका उपचार न किया जाए तो कुष्ठरोग पूरे शरीर में फैल सकता है जिससे शरीर की त्वचा, नसों, हाथ-पैरों और आंखों सहित शरीर के कई भागों में स्थायी क्षति हो सकती है। इस रोग से त्वचा के रंग और स्वरूप में परिवर्तन दिखाई देने लगता है। कुष्ठ रोग में त्वचा पर रंगहीन दाग हो जाते हैं जिन पर किसी भी चुभन का रोगी को कोई असर नहीं होता। इस रोग के कारण शरीर के कई भाग सुन्न भी हो जाते हैं।

 कुछ लोगों का विश्वास है कि कुष्ठ रोग केवल स्पर्श मात्र से हो जाता है, लेकिन यह भी कुष्ठ रोग के बारे में बहुत बड़ी भ्रांति है।

 कुछ लोग मानते हैं कि कुष्ठ रोग अत्यंत संक्रमणशील है, लेकिन यह भी कुष्ठ रोग के बारे में फैला हुआ भ्रम है बल्कि कुष्ठ रोग के ऊपर किए गए अनुसंधानों में पाया गया है कि 80 प्रतिशत लोगों में कुष्ठ रोग असंक्रामक होता है, शेष 20 प्रतिशत कुष्ठ पीड़ितों का इलाज सही समय से हो जाए तो कुष्ठ रोग कुछ ही दिनों में असंक्रामक हो जाता है।

  कुछ लोग समझते हैं कि कुष्ठ रोग लाइलाज है, लेकिन इस रोग के संबंध में लोगों में यह गलत धारणा है। आज कुष्ठ रोग का इलाज संभव है। यदि लक्षण दिखते ही कुष्ठ रोग का उपचार शुरू कर दिया जाए तो इस रोग से मुक्त होना निश्चित है।

 कुछ लोग मानते हैं कि जिन परिवारों में कुष्ठ रोगी हैं, उस परिवार के बच्चों को कुष्ठ रोग होगा ही। लेकिन यह भी कुष्ठ रोग के बारे में फैली हुई सबसे बड़ी भ्रांति है, क्योंकि अनुसंधानों से सिद्ध हो चुका है कि यह बीमारी वंशानुगत नहीं है और इसके अधिकतर मामले असंक्रामक होते है।

*वीईई संजय मालवीय के द्वारा कुष्ठ रोग का इलाज*

आज आधुनिक चिकित्सा प्रणाली ने इतनी तरक्की कर ली है कि कुष्ठ रोग का इलाज कई वर्ष पूर्व ही संभव हो गया था। आज के समय में इस रोग की मल्टी ड्रग थैरेपी उपलब्ध है। अगर सही इलाज किया जाए तो रोगी निश्चित ही कुष्ठ रोग से मुक्त होकर एक सामान्य जिंदगी जी सकता है

वर्तमान समय में कुष्ठ रोग का इलाज 2 प्रकार से हो रहा है। पॉसी-बैसीलरी कुष्ठ रोग (त्वचा पर 1-5 घाव का होना) का उपचार 6 माह तक राइफैम्पिसिन और डैप्सोन से किया जाता है बल्कि मल्टी-बैसीलरी कुष्ठ रोग (त्वचा पर 5 से ज्यादा घाव का होना) का उपचार 12 माह तक राइफैपिसिन, क्लॉफैजिमाइन और डैप्सोन से किया जाता है। सरकारी अस्पताल द्वारा रिहाइशी इलाकों में मौजूद स्वास्थ्य केंद्रों में कुष्ठ रोग का नि:शुल्क इलाज उपलब्ध है। भारत में राष्ट्रीय जालमा कुष्ठ एवं अन्य माइकोबैक्टीरियल रोग संस्थान का कुष्ठ रोग के क्षेत्र में अहम योगदान है

 *कुष्ठ रोग की रोकथाम*

* मल्टी ड्रग थैरेपी ने कुष्ठ रोग की रोकथाम के लिए अहम भूमिका निभाई है, अगर रोगी का समय रहते पता लग जाए तो उसका पूरा इलाज कराना चाहिए और बीच में इलाज को छोड़ना नहीं चाहिए। अगर रोगियों का समय रहते इलाज होगा तो कुछ नाममात्र के संक्रामक मामलों में कुछ दिनों मई ही कमी आ जाएगी, क्योंकि कुष्ठ रोग के संक्रामक रोगी का इलाज शुरू होते ही कुछ दिनों में उसकी संक्रामकता खत्म हो जाती है, वैसे कुष्ठ रोग के अधिकतर मामले असंक्रामक ही होते हैं।

 बीसीजी का टीका लगाने से भी कुष्ठ रोग से सुरक्षा प्राप्त होती है।

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