तपस्या एकांत सुख का मार्ग है - प्रवर्तक जिनेन्द्रमुनिजी | Tapasya ekant sukh ka marg hai

तपस्या एकांत सुख का मार्ग है - प्रवर्तक जिनेन्द्रमुनिजी

तपस्या एकांत सुख का मार्ग है - प्रवर्तक जिनेन्द्रमुनिजी

थांदला (कादर शेख) - जिनेश्वर भगवान ने तपस्या को एकांत सुख का मार्ग बताया है। मोक्ष मार्ग के अनुरागी को तपस्या से उत्पन्न शरीर के कष्ट की अनुभूति भी सुखकारी ही लगती है। उक्त धर्मोपदेश श्रीमती सपना बहन के मासक्षमण तप बहुमान में धर्मदास गण के प्रमुख प्रवर्तक पूज्य श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. ने कही। सोशल डिस्टेंश में संघ के प्रमुखजन व व्होरा परिवार सगे सम्बन्धियों के बीच तप बहुमान कार्यक्रम में प्रवर्तक श्री ने कहा की तपस्वी स्व इच्छा से तपस्या कर इन्द्रिय निरोध करता है व अन्नाहार का त्यग करता है जिससे उसे एकांत सुख ही मिलता है। उन्होंने आगम प्रमाण देते हुए कहा कि दशवैकालिक सूत्र में चौथी तप समाधि बताई है। जीव को खाते खाते तो अनन्तकाल बित गए उसे अनाहरक दशा प्राप्त करने उसका अभ्यास करना चाहिए कदाचित वह सूर्यास्त के 20 मिनट पूर्व सर्वाहार त्याग कर सूर्योदय तक रहता भी है। इसी प्रकार तपस्या ही एकांत सुख दिलाने वाली होती है।


धर्मसभा को सरल स्वभावी पूज्य श्री गिरीशमुनिजी ने सम्बोधित कर विषम काल में सन्त सुरक्षा की संघ नीति को धन्यवाद देते हुए सकल संघ के त्याग की प्रशंसा करते हुए तप को आत्म सुरक्षा कवच बताते हुए कहा कि इस कवच से ही आत्मा परमात्मा बन जाता है। उन्होंने व साध्वी रत्ना पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. आदि सतियों ने तप व तपस्वी अनुमोदना स्तवन के माध्यम से बताई। इस अवसर पर श्रीसंघ अध्यक्ष ने समस्त तपस्वियों का श्रीसंघ की ओर से गुणगान करते हुए संघ पर कृपा दृष्टि बनाये रखने के लिये गुरुभगवन्तों का उपकार माना।


*गुरुदेव पधारें आँगनें मासक्षमण री भेंट धरु - सपना व्होरा*

तप प्रधान जैन धर्म में हर व्यक्ति का सपना होता है कि वह जीवन में एक बार मासक्षमण की तपस्या कर अपनी आत्मा का कल्याण कर दीर्घ तपस्वी बने। बिरले ही होते है जो इस कठिन लक्ष्य को सहज ही हासिल कर लेते है। जिनशासन गौरव जैनाचार्य पूज्य श्री उमेशमुनिजी म.सा. "अणु" के प्रशिष्य धर्मदास गण गौरव बुद्धपुत्र प्रवर्तक देव पूज्य श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. आदि ठाणा - 4 व उन्ही की आज्ञानुवर्ती पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा - 4  के चातुर्मास की घोषणा के समय ही श्रीमती सपना प्रदीप व्होरा ने मासक्षमण तप का संकल्प कर लिया था जो उन्होंने इस वर्षावास के प्रथम मासक्षमण के रूप में पूर्ण कर लिया। कोरोना समय की आपदा को अवसर बनाते हुए उन्होंने इस कठिन लक्ष्य को हासिल किया है। 

*धर्मनिष्ठ परिवार में उनकी तपस्या की निरन्तरता व संघ सेवा*

अपने जीवन में दूसरा मासक्षमण पूर्ण करने वाली सपना बहन अपने विवाह पूर्व वर्ष 1992 में एक मासक्षमण लिमडी में कर चुकी है, यही नही वे लगातार 10 वर्षों से निरन्तर एकान्तर (एकासन) की आराधना भी कर रही है। इस दौरान वे दो बार अट्ठई तप व आयम्बिल की 27 लड़ी भी पूर्ण कर चुकी है। सचित जल का आजीवन त्याग के साथ उनका पूरा परिवार आजीवन जमीकंद त्याग कर चुका है वही रात्रि भोजन भी त्याग अनुपम है व उनके परिवार की संघ निष्ठा भी अनुकरणीय है।

*थांदला में तपस्या की बहार*

उनके उग्र तप में सहयोगी बन अपने जीवन में दुर्लभ तपस्या कर श्रीमती रंजना श्रेणिकजी गादिया व श्रीमती अमिता प्रदीपजी गादिया 13 तेला-तेला तप की आराधना आगे बढ़ा रही है, उन्होंने लगातार सातवा तेला पूर्ण कर आठवें चरण में प्रवेश कर लिया है। श्रीसंघ अध्यक्ष जितेंद्र घोड़ावत की धर्मपत्नी श्रीमती सुनीता घोड़ावत, उनकी बहू श्रद्धा चिरागजी घोड़ावत, पूर्व अध्यक्ष महेश व्होरा की पुत्री कु. प्रिया व्होरा व कु. खुशबू प्रवीणजी पालरेचा, स्वाध्यायी वीरेंद्र मेहता भी धर्मचक्र की तपस्या कर रहे है।

*श्रीसंघ व आईजा संगठन सहित अन्य संस्थाओं ने किया बहुमान*

श्रीमती सपना बहन व्होरा के 32 उपवास की मासक्षमण तपस्या की अनुमोदना करते हुए श्रीसंघ
 कि ओर से सर्व प्रथम उनके पुत्र आयुष व्होरा ने 9 उपवास, श्रीमती पुखराज व्होरा, मयंक व्होरा ने 8 उपवास, श्रीमती अलका व्होरा ने आयम्बिल से सिद्धितप, श्रीमती सरोज बहन ने एकासन के मासक्षमण तप व आशीष व्होरा, अनिता लुक्कड़ आदि ने छुट्टी तपस्या की बोली लेकर संघ कि ओर से बहुमान किया वही संघ के पूर्वाध्यक्ष प्रकाशचंद्र घोड़ावत, महेश व्होरा, रमेशचन्द्र चौधरी, भरत भंसाली, नगीनलाल शाहजी, पूनमचंद गादिया, धर्मलता महिला मंडल अध्यक्षा श्रीमती शकुंतला कांकरिया आदि ने शाल, माला व अभिनन्दन पत्र से उनका बहुमान किया। इस तारतम्य में तेरापंथ महासभा से अरविंद रुनवाल, रतनलाल दक, दिनेश मेहता, अभय रुनवाल ने, ऑल इण्डिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजा) के प्रदेशाध्यक्ष पवन नाहर, समकित तलेरा, जितेंद्र सी घोड़ावत ने, नेचरल गोल्ड परिवार से लोकेश गादिया, माणक लोढ़ा ने, घोड़ावत परिवार से श्रीमती सुनीता व श्रद्धा घोड़ावत ने भी दीर्घ तपस्वी का बहुमान किया।

*यह भी रहे उपस्थित*

संघ द्वारा आयोजित संक्षिप्त बहुमान कार्यक्रम में संघ के वयोवृद्ध श्रावक गेंदालाल शाहजी, संघ कोषाध्यक्ष प्रकाशचंद्र शाहजी, रमेशचन्द्र श्रीमाल, राजेन्द्र व्होरा, कनकमल घोड़ावत, रजनीकांत लोढ़ा, समरथमल पालरेचा, सुरेशचंद्र व्होरा, ललित जैन नवयुवक मंडल अध्यक्ष कपिल पिचा आदि उपस्थित थे धर्म सभा का संचालन संघ के सचिव प्रदीप गादिया ने किया उक्त जानकारी संघ प्रवक्ता पवन नाहर ने दी इस अवसर पर व्होरा परिवार ने संघ को दानराशि भेंट की गई व धर्म प्रभावना का लाभ भी लिया।

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