सुखी जीवन का मंत्र - जो मिले उसमें ही सुख को ढूंढ लो | Sukhi jivan ka mantr jo mile usme hi sukh ko dhund lo

सुखी जीवन का मंत्र - जो मिले उसमें ही सुख को ढूंढ लो 

संस्कार साधना शिविर के चौथे दिन राष्ट्रसंत श्री प्रमुखसागरजी महाराज ने प्रवचन में कहां

सुखी जीवन का मंत्र - जो मिले उसमें ही सुख को ढूंढ लो

जावरा (यूसुफ अली बोहरा) - राष्ट्रसंत 108 श्री प्रमुख सागरजी महाराज ने संस्कार साधना शिविर के चौथे दिन प्रवचन में कहा कि सुखी जीवन का मंत्र है जो मिले उसमें ही सुख को ढूंढ लो l धर्म कोई खराब नहीं होता जो समझ में आ जाए वह सब अच्छा है धर्म की परिभाषा यही है कि जो धर्म धारण किया जाए धर्म हमें प्रेम, दया, वात्सल्य, करुणा ,मैत्री, एवं सद्भाव सिखाता है l सोच धर्म सफाई का धर्म है सोच धर्म में वैभव है सोच धर्म  वस्तु से परहेज करने का धर्म है  लोक धर्म बाहर का धर्म है l हमें कई बार  पड़ोसी के बच्चे अच्छे लगते हैं यह सोच धर्म ही अनुचित है l काम क्रोध लोभ एवं मोह हमें छोड़ना होगा नहीं तो यह कसाएं हमारे जीवन को दिग्भ्रमित कर देगी जब भी लोभ का जन्म होता है जहां से वह प्राप्त होता है वह लोभ की ओर अग्रसर होता है लाभ से ही लोभ का जन्म होता है इसलिए हमें लोभ के प्रपंच से दूर रहना चाहिए l आचार्यश्री ने फरमाया कि यदि हमें मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होना है तो हमें तप की आवश्यकता को अंगीकार करना होगा जो व्यक्ति खुद को कमजोर मिलता है वह मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता जबकि मोक्ष से ही जीवन का कल्याण होता है वर्तमान दौर में लोगों में लगातार तृष्णा बढ़ती जा रही है ज्यों-ज्यों पैसा आता है त्यों त्यों तृष्णा कहीं ज्यादा बढ़ रही है लोभ को हटाने के लिए हमें संतोष की प्रवृत्ति को धारण करना होगा अर्थात जो हमारे पास है वह पर्याप्त है यह मन में धारणा बनाना होगी l हमें उत्तम सोच के मंत्र को भी जीवन में अंगीकार करना होगा हमें यह मानना होगा कि जो मेरा नहीं है वह चला जाएगा और जो रहना है वह रहेगा l
आचार्यश्री ने करीब 53 मिनट के  प्रवचन में कहा कि क्रोध मान एवं लोभ खतरनाक तीन भाई  है लेकिन लेकिन तीन भाइयों के बीच खतरनाक  एक बहन है - माया और माया की छाया जिस पर भी पड़ जाए फिर उसकी काया खराब होना निश्चित है l आपने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान राम ने हिरण के लोभ में मां सीता को गवा दी और काले हिरण के लोभ में फिल्म अभिनेता सलमान को जेल जाना पड़ा l लोभ के कारण हर कोई दो नंबर का पैसा कमाने की और  भागा फिर रहा है और यही दो नंबर का पैसा दो नंबर के ही काम कराता है यदि अच्छा पैसा आएगा तो सारे काम सत्कर्म के कार्य संपादित होंगे सत्कर्म की वशीभूत ही राजा चक्रवर्ती को 48 मिनट में ही ज्ञान प्राप्त हुआ लोभी व्यक्ति अच्छा भोजन नहीं कर सकता और वह लोभ में रहकर अपना  स्वास्थ्य खराब कर लेता है और जब उसका स्वास्थ्य खराब होता है तो स्वास्थ्य ठीक करने के लिए चाहे जितना पैसा खर्च करने को भी उद्धत हो जाता है  निर्लोंभी  व्यक्ति किसी के सामने हाथ नहीं फैलाता और वह  व्यक्ति हमेशा दुखी रहता है इसलिए जो भी तुम्हारा है उसी में संतोष संतोष करो यह अवधारणा मन में संजोए रखनी चाहिए l प्रवक्ता  रितेश जैन ने बताया कि सर्वप्रथम समाजसेवी अनिल कोठारी एवं परिवारजनों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया l शांतिधारा का लाभ समाजसेवी सुरेश अग्रवाल ने लिया l
आचार्य श्री प्रमुखसागर दिगंबर जैन धार्मिक एवं परमार्थिक न्यास के अध्यक्ष महावीर मादावत, महामंत्री विजय ओरा , कोषाध्यक्ष हिम्मत गंगवाल, उपाध्यक्ष पुखराज सेठी व सुनील कोठारी , मंत्री पवन पाटनी सह कोषाध्यक्ष, संजय दोसी , प्रशासनिक व्यवस्थापक रितेश जैन , पुष्पदंत जैन, कांतिलाल अंतिम कियावत ,नरेंद्र गोधा, अजय दोसी  राजेश भाचावत, राजकुमार ओरा, अंकित मादावत  व अशोक संघई ने जावरा से 3 किलोमीटर दूर प्रस्तावित अहिंसा तीर्थ निर्माण स्थल की भूमि की रजिस्ट्री आचार्यश्री को भेंट की l आचार्यश्री ने सभी न्यासी गणों को आशीर्वाद देते हुए यह रजिस्ट्री वापस न्यासीगणों  के सुपुर्द की l अहिंसा तीर्थ के निर्माण हेतु भूमि के दानदाता  समाजसेवी महावीर मादावत के जयकारे की अनुमोदना के साथ उनका सपरिवार सम्मान किया गया lकार्यक्रम का संचालन महामंत्री विजय औरा एडवोकेट ने किया l

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