समूह के माध्यम से महिलाएं हो रही आत्म विश्वासी | Samuh ke madhyam se mahilaye ho rhi vishvasi

समूह के माध्यम से महिलाएं हो रही आत्म विश्वासी

समूह से जुड़ी सीमा मजदूर से किराना दुकान मालिक बनी खुशियों की दास्ता

समूह के माध्यम से महिलाएं हो रही आत्म विश्वासी

रतलाम (संदीप बरबेटा) - महिलाएं समूह के माध्यम से अब आत्मनिर्भर हो रही है,  समूह में संगठित होकर महिलाएं आत्मविश्वासी हो रही हैं, साथ ही उनके जीवन में बदलाव भी आ रहा है। खासतौर पर महिलाएं समूह के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति को सशक्त करते हुए अपने परिवार के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में उल्लेखनीय रूप से सहायक सिद्ध हो रही हैं। रतलाम जिले के ग्राम उम्मेदपुरा की सीमाबाई की आर्थिक स्थिति भी समूह में शामिल होने के पश्चात अच्छी हो गई है, उसके जीवन में बदलाव आया है।
   
आठवीं कक्षा उत्तीर्ण सीमाबाई जिले की नवाबगंज ग्राम पंचायत के उम्मेदपुरा गांव की रहने वाली है। उसका परिवार मजदूरी पर निर्भर था। अक्सर पूरे महीने मजदूरी भी नहीं मिलती थी, आर्थिक खींचतान के कारण परिवार परेशान रहता था। प्रायः परिवार चलाने के लिए पति-पत्नी को साहूकार से कर्ज लेना पड़ता था। अब जो मजदूरी से पैसा आता है, वह थोड़ा बहुत घर खर्च में काम आता और ज्यादा ब्याज में ही चला जाता, कर्ज हमेशा बना रहता। इस दौरान उम्मेदपुरा में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े कर्मचारी आए, जिन्होंने ग्राम की महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बनाने एवं समूह से जुड़ने के फायदे समझाएं, बात महिलाओं के समझ में आई। सीमाबाई द्वारा भी  आदर्श स्वयं सहायता समूह गठित किया गया। समूह की नियमित बैठकें आयोजित की गई, बचत राशियां जमा हुई। समूह से ही ऋण लेकर सीमा ने अपनी खुद की किराना दुकान खोली जो आज उसके द्वारा बहुत अच्छे ढंग से संचालित हो रही है। परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आ गया है, लगभग 6 से 8 हजार रूपए प्रतिमाह घर बैठे कमाई किराना दुकान से होती है। समूह का संचालन भी बहुत अच्छे से किया जा रहा है।
   
सीमाबाई खुश है, उसका परिवार भी खुश है। महिलाओं को स्वयं सहायता समूह के रूप में संगठित करके उनके आर्थिक स्तर को ऊंचा उठाने के लिए मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा की गई पहल की सीमाबाई एवं उसके समूह से जुड़ी महिलाएं सराहना करती हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री की इस पहल से निश्चित रूप से गरीब परिवारों का जीवन स्तर ऊंचा उठ रहा है और आगे चलकर  परिवार एवं महिलाएं प्रगति के नए आयामों को स्थापित कर सकेंगे।

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