प्रशाषन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन नही किये जाने के कारण नगर मैं कोरोना आया | Prashasan dvara jari adviseri ka palan nhi kiye jane ke karan nagar

प्रशाषन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन नही किये जाने के कारण नगर मैं कोरोना आया

प्रशाषन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन नही किये जाने के कारण नगर मैं कोरोना आया

रानापुर (ललित बंधवार) - संभ्रांत लोगों की लापरवाही ग्रामीण जनता एवं छोटे व्यापारियों को ले डूबी । गुरुवार को रानापुर थाने पर प्रशासकीय अधिकारियों एवं बड़े व्यापारियों के द्वारा आयोजित मीटिंग में आम जनता के हित को देखते हुए एवं उनके स्वास्थ्य की चिंता करते हुए समस्त व्यापारियों एवं उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों ने आम सहमति से निर्णय किया कि प्रत्येक सप्ताह शनिवार ,रविवार और सोमवार रानापुर मार्केट बंद रहेगा तथा शेष दिनों मैं सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक ही मार्केट खुला रहेगा । ये सारी व्यवस्था कोरोना की चैन तोड़ने के लिए की गई किंतु यहाँ एक बात बताना बहुत जरूरी है कि नगर मैं कोरोना ग्रामीणों ,किसानों या उपभोक्ताओं के कारण नही आया , नगर के सभ्रांत लोगो ने कोरोना के संदर्भ में प्रशाषन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन नही किये जाने के कारण नगर मैं कोरोना आया । आज नगर मैं जो भी कोरोना पीड़ित है उन्हें नगर में आने वाले किसी ग्रामीण , किसान या उपभोक्ता के संपर्क में आने से कोरोना नही हुवा बल्कि बिना उचित सावधानी बरतें अकारण बाहर आने जाने में ये समझदार लोग जाने अनजाने अपने साथ कोरोना वायरस नगर में लेकर आये ।यदि इनके द्वारा प्रयाप्त सावधानी बरती जाती तो आज नगर बंद करने की आवश्यकता नही होती । पूर्व मैं भी लॉक डाउन मै क्या हुवा ,सभी जानते है ,लोगो ने वो माल भी बेच दिया जो सालों से नही बिका था ,और जनसेवा के नाम से ..............। खैर अब जब निर्णय कर ही दिया तो हम उस निर्णय के विरुद्ध नही है पर जिन लोगो के प्रयासों से बंद का निर्णय हुवा ,क्या वे चोरी छुपे माल बेचने वालों और अधिक दाम लेने वालों पर लगाम लगा पाएंगे ? क्या वे बंद के दौरान अपने घर दुकानों के बाहर झुंड बना कर गप्पे मारने वालों को घर मे रहने की समझाइश दे पाएंगे और बिना काम के नगर मैं घूमने वाले इस गंभीरता को समझ पाएंगे , या एक बार फिर बंद के नाम पर छोटे व्यापारियों ,फुटकर दुकानदारों ,हाथ ठेला व्यवसायियों की कमर तोड़ कर उन्हें आर्थिक परेशानी उठाने को मजबूर होना पड़ेगा । इस गंभीर निर्णय में हमारा किसी का विरोध करने का कतई मतलब नही है अपितु वास्तविकता को सभी के समक्ष लाना और समझदार लोगो द्वारा की जा रही गलतियों का खामियाजा अन्य लोगो द्वारा भुगतने के कारण लिखने की आवश्यकता होने से जरूरी हुवा ।

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