दूसरों को दे रहे सुरक्षा लेकिन खुद है असुरक्षित | Dusro ko de rhe suraksha lekin khud hai asurakshit

दूसरों को दे रहे सुरक्षा लेकिन खुद है असुरक्षित

दूसरों को दे रहे सुरक्षा लेकिन खुद है असुरक्षित

डिंडौरी (पप्पू पड़वार) - कानून व्यवस्था की स्थिति संभालने के लिए पुलिस कर्मियों द्वारा 12 से 18 घंटे कार्य करने के बावजूद उन्हें सीमित संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। साथ ही उन्हें अनुशासन में बांधकर अपनी लड़ाई से वंचित रखा गया है। राजनेता एवं आम जनता भी पुलिस से तत्परतापूर्वक कार्य करने तथा घटना स्थलों पर तत्काल पहुंचने की उम्मीद रखती है, लेकिन उनकी समस्याओं के निराकरण की ओर ध्यान देने के बजाय दोषारोपण कर उनका मनोबल तोडऩे का कार्य करती है।


वर्तमान समय में आधुनिकता के अंधी दौड़ में एक ओर जहां आपराधिक तत्व तेज गति से चलने वाले वाहनों एवं उपकरण का उपयोग कर अपनी गतिविधियां संचालित करते हैं वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने पुलिस कर्मचारियों को आजादी के पूर्व 1860 के बनाए अंग्रेजों के कानून के तहत बांधे रखा है। 

मामला जिला डिंडौरी के थाना 

समनापुर का है जहां पुलिस कर्मियों को आवास सुविधा के नाम पर लगभग सात दशक पूर्व के बने जीर्णशीर्ण भवनों में रहने की विवशता है। वह भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है, क्योकि पूर्व की अपेक्षा पुलिस बल में वृद्धि की जा चुकी है और उस अनुपात में आवासों का निर्माण नहीं कराया गया है।

ऐसी स्थिति में पुलिस कर्मचारियों को किराए के मकान में रहने को बाध्य होना पड़ता है। किराया भत्ता के रूप में पुलिस कर्मियों को कुछ रूपए दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन शासकीय प्रक्रिया जटिल होने के कारण अधिकांश पुलिसकर्मी इस भत्ता से वंचित रहते हैं एवं कम राशि में कोई किराए का आवास भी नहीं मिल पाता। 

पालीथिन के सहारे कट रही जिंदगी 

पुलिस विभाग के कर्मचारी कंडम घोषित हो चुके आवासों में रह रहे है। मकान पूरी तरह से गिरने की कगार पर पहुंच गए है और जान जोखिम में डालकर कर्मचारी यहां रह रहे है। हालत यह है कि घर की छत में उनको पालीथिन बांधना पड़ रहा है जिससे बारिश का पानी घरों के अंदर न घुसे। वहीं मकान का हिस्सा धीरे-धीरे गिर रहा है। कई स्थानों में प्लास्टर टूटकर गिर गया है और दीवालों में दरारें आ गई है। यहां पर ज्यादातर कर्मचारी अपने परिवार सहित निवास करते है जो हर समय दुर्घटना की आशंका सहमे रहते है। छप्पर में अब बारिश का पानी रोक पाने की क्षमता भी नहीं रही पुलिसकर्मियों ने बारिश का पानी रोकने के लिए छत में पालीथिन लगाई है जिससे किसी तरह उनका जीवन कट रहा है।

उक्त बिल्डिंग की हालत देखकर पुलिसकर्मियों की जिंदगी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

 शौचालय भी क्षतिग्रस्त

पुलिस कर्मियों के रहने के लिए बने शासकीय क्वक्वार्टरों एवं बैरकों के शौचालय और सेप्टिक टैंक जीर्ण-शीर्ण होकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। सेप्टिक टैंक के क्षतिग्रस्त हो जाने से उसके आसपास दिन भर सुअरों का जमावड़ा लगा रहता है। बदबू से आसपास का वातावरण प्रदूषित हो रहा है। शौचालय के अभाव में कई पुलिस कर्मी थाना में निर्मित एक मात्र शौचालय जिसे बंदियों के लिए बनाया गया है उसका उपयोग कर रहे हैं

कर्मचारियों ने मरम्मत करवाकर रहने योग्य बनवाया

उक्त कालोनी के जर्जर हो चुके आवासों की काफी हद तक कर्मचारियों ने ही मरम्मत करवा डाली है। कमरों में टूटे प्लास्टरों व दरारों को भरवाकर किसी तरह कमरों को रहने योग्य बनवाया है। हालांकि बिल्डिंग पूरी तरह से  जर्जर हो चुकी है लेकिन फिर भी थोड़ा बहुत काम करवाकर कर्मचारी उसमें रह रहे है।

इनका कहना है

आपके माध्यम से पुलिस आवासों की बदहाल स्थिति के बारे में जानकारी मिल रही है।मैं निरीक्षण करने गया तो था लेकिन किसी ने समस्या नहीं बताई। बजट की व्यवस्था कर आवासों को दुरुस्त कराया जायेगा। इस समस्या को में गंभीरता से दिखवाता हूँ। 

संजय सिंह 
पुलिस अधीक्षक डिंडौरी

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