लॉकडाउन के बीच नेत्रहीन गरीब बैगा की सहायता को आगे आए समाजसेवी
डिंडौरी (पप्पू पड़वार) - डिंडौरी जिला के जनपद समनापुर मुख्यालय से करीब पंद्रह किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत छांटा बैगा टोला की सुनसान पहाड़ी में लॉकडाउन के बीच अपना जीवन व्यतीत करने को मजबूर बैगा जनजाति के नेत्रहीन घिन्हा बैगा को बेबसी की जिंदगी से उबारने के लिए समनापुर का नवजीवन सहायतार्थ संगठन आगे आया है। संगठन की ओर से नेत्रहीन बैगा की आर्थिक मदद के साथ खाद्य सामग्री व जरुरत का सामान दिया गया है। गौरतलब है कि छांटा के बैगा टोला निवासी घिन्हा को जन्म से ही दिखाई नहीं देता है। कुछ वर्ष पूर्व माता-पिता के गुजर जाने के बाद यह अकेले ही सुनसान पहाड़ी में गुजर बसर करने को मजबूर है। नेत्रहीन होने के बाद भी अपने लिए खाना बनाना पहाड़ी से उतरकर हैंडपंप से पानी भरना, कपड़े धोने के साथ गांव की दुकान पर समान की खरीदारी करने तक के काम बिना देखे करता हैं। यह काम करने में उनको किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होती है। लॉकडाउन की स्थिति में दुकाने बंद होने के कारंण जरूरत की सामग्री खरीदने दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
संगठन ने की सहायता
घिन्हा बैगा की मदद का जिम्मा समनापुर के नवजीवन सहायतार्थ संगठन ने उठाया है। वहीं संगठन की ओर से बैगा युवक को आटा, दाल, तेल, शक्कर, राशन का सामान, कपड़े, बिस्तर, पेटी दी गई है। संगठन के सदस्यों ने समनापुर से नाई को ले जाकर नेत्रहीन बैगा के पहले बाल कटवाए फिर नहलाने ले गए और नए वस्त्र पहनाकर साथ में बैठकर भोजन किया। इन सबके बीच नेत्रहीन बहुत खुश दिखाई दिया। इस संबंध में संगठन के सदस्य सुनील हथेश ने बताया कि संगठन का उद्देश्य है कि पीड़ित व्यक्ति अपने को किसी भी प्रकार से बेबस न समझें ।
जर्जर झोपड़ी, मौत के साए में जीवन बसर कर रहा नेत्रहीन
एकदम जर्जर हो चली झोपड़ी, ओलावृष्टि के दौरान फटे तिरपाल और टूट-टूट कर झोपड़ी की गिरती लकड़ियों के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर है नेत्रहीन घिन्हा बैगा। उसने कई बार ग्राम पंचायत के सरंपच सचिव से लेकर जनपद पंचायत तक आवेदन दिया, लेकिन अब तक उसे एक आवास तक नसीब नहीं हो पाया है। उसके पास अपने भरण पोषण तक का इंतजाम नहीं है। ऐसे में वह अपनी झोपड़ी का मरम्मत कैसे कराए, यह समझ से परे है। पूर्व में परेशान बैगा ने कई बार जिला स्तर पर भी फरियाद सुनाते हुए मांग की थी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उसे पक्का मकान उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद भी उसे आवास का लाभ नहीं मिल सका है।
बारिश के दिनों में होती अधिक परेशानी
दिव्यांग बैगा की झोपड़ी क्षतिग्रस्त हो जाने से घर के भीतर बारिश का पानी भर जाता है। ऐसे में उसे झोपड़ी के भीतर कीचड़ और पानी के बीच रहने सोने, जीवन यापन करने मजबूर होना पड़ता है। नेत्रहीन घिन्हा बैगा ने समाजसेवियों व मीडिया कर्मियों को अपनी झोपड़ी को टटोलते हुए बताया कि उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव से प्रधानमंत्री आवास की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। झोपड़ी गिरने के कगार पर है। कभी भी कोई गंभीर दुर्घटना घट सकती है।
इनका कहना है
घिन्हा बैगा को वर्षों पहले इंदिरा आवास का लाभ मिला था। वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री आवास के लिए जनपद पंचायत में प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।
जमुना प्रसाद गवले
सचिव ग्राम पंचातय छांटा।
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