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मोदी सरकार का बड़ा अभियान: 324 जिलों के 1 लाख आदिवासी गांवों की बदलेगी तस्वीर, बनेगी पंचवर्षीय विकास योजनाएं Aajtak24 News |
नई दिल्ली – केंद्र सरकार आदिवासी समाज के उत्थान और उनके गांवों की तस्वीर बदलने के लिए एक ऐतिहासिक पहल करने जा रही है। इस योजना के तहत देश के 324 जिलों के करीब 1 लाख आदिवासी गांव चुने गए हैं, जहां ग्रामीण स्वयं अपनी पंचवर्षीय विकास योजनाएं तैयार करेंगे। सरकार का दावा है कि यह पहल आदिवासी समाज को आत्मनिर्भर बनाएगी और सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगी।
ग्रामीण खुद बनाएंगे विकास का खाका
अब तक आदिवासी इलाकों में योजनाएं ऊपर से बनाई जाती थीं, लेकिन यह पहली बार होगा जब गांववाले खुद तय करेंगे कि उनके विकास की प्राथमिकताएं क्या होंगी। उदाहरण के तौर पर कोई गांव स्वास्थ्य केंद्र की मांग करेगा, तो कोई स्कूल या सड़क की। इस तरह हर गांव की पंचवर्षीय योजना उसी गांव की जरूरतों पर आधारित होगी। इस प्रक्रिया को 2 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यानी गांधी जयंती तक इन 1 लाख गांवों की योजनाएं तैयार होंगी और उसके बाद उन्हें क्रियान्वित किया जाएगा।
20 लाख अधिकारियों की बड़ी जिम्मेदारी
इस महत्वाकांक्षी अभियान को सफल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 20 लाख अधिकारियों को प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। ये अधिकारी ब्लॉक और ग्राम स्तर पर जाकर न सिर्फ ग्रामीणों को योजनाएं बनाने में मदद करेंगे बल्कि यह भी सुनिश्चित करेंगे कि स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, आवास और रोजगार जैसी सभी सरकारी योजनाएं 100% कवरेज के साथ लागू हों। जनजातीय मामलों के मंत्रालय के अनुसार, यह प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं होगा बल्कि एक व्यवहार परिवर्तन अभियान भी होगा, ताकि अधिकारी आदिवासी समाज की संस्कृति और समस्याओं को समझकर संवेदनशीलता के साथ काम करें।
हर गांव में बनेगा ‘आदि सेवा केंद्र’
इस योजना का एक और बड़ा आकर्षण है ‘आदि सेवा केंद्र’। यह प्रत्येक गांव में स्थापित होगा और इसे ग्रामीणों के लिए एकल-खिड़की समाधान केंद्र कहा जा सकता है। यहां
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सभी सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध होगी,
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शिकायत निवारण रजिस्टर रहेगा,
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अधिकारियों के दौरे का कैलेंडर होगा,
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हर विभाग का स्थानीय संपर्क व्यक्ति तय किया जाएगा।
इसके अलावा हर सोमवार को एक अधिकारी गांव में आएगा और ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर उनका तुरंत समाधान करेगा। शिकायत पर उठाए गए कदमों का विवरण भी रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।
आदिवासी मामलों का मंत्रालय आगे बढ़ा रहा है अभियान
इस अभियान को ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ नाम दिया गया है। मंत्रालय का कहना है कि यह केवल योजनाओं का संकलन नहीं है बल्कि आदिवासी समुदाय को निर्णय लेने की प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल करने का प्रयास है। इससे सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।
आदिवासी समाज के लिए नया दौर
इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव यह होगा कि आदिवासी समाज अब विकास का सिर्फ लाभार्थी नहीं बल्कि योजनाकार भी बनेगा। स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण जैसी बुनियादी सुविधाओं तक आसान पहुंच, रोजगार के अवसर और आधारभूत ढांचे के विकास से आदिवासी गांवों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। राजनीतिक दृष्टि से यह योजना सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ की नीति से जुड़ी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सफल रहती है तो यह आदिवासी समुदाय के बीच सरकार की पकड़ को और मजबूत करेगी।
आने वाले वर्षों की तस्वीर
अगर यह अभियान अपने लक्ष्य तक पहुंचता है, तो आने वाले वर्षों में आदिवासी गांवों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। यह केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं होगा बल्कि ग्राम स्वराज की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो सकता है, जहां गांव अपने भविष्य की दिशा स्वयं तय करेंगे।