कृषि विभाग बुरहानपुर की खेतों में नरवाई नही जलाने की अपील
खेतों में आग नही लगाये खेत की मिट्टी की उत्पादकता कम होती है
बुरहानपुर। (अमर दिवाने) - किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उपसंचालक एम.एस.देवके ने जिले के किसानों से अपील की है कि, गेहूँ/गन्ना कटने के बाद बचे हुए फसल के अवशेषों (नरवाई) को खेतों में न जलायें क्योंकि यह खेती के लिये आत्मघाती कदम है। जिससे जन-धन को नुकसान होने की संभावना बनी रहती है, व मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं, नरवाई में आग लगाने से भूमि में उपलब्ध जैव विविधता समाप्त होती है, भूमि में उपस्थित सूक्ष्म जीव जलकर नष्ट हो जाते है, सूक्ष्म जीवों के नष्ट होने के फलस्वरूप जैविक खाद का निर्माण बंद हो जाता है।
श्री देवके ने जानकारी देते हुए बताया कि भूमि की ऊपरी परत में ही पौधों के लिये आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, आग लगने के कारण पोषक तत्व जलकर नष्ट हो जाते है, नरवाई जलाने से भूमि कठोर हो जाती है, जिसके कारण भूमि की जल धारण क्षमता कम हो जाती है, फसलें सूख जाती है, खेत की सीमा पर लगे पेड़ पौधे आदि जलकर नष्ट हो जाते हैं, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्णय अनुसार नरवाई जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है, वातावरण के तापमान में वृद्धि होती है, जिससे धरती गर्म हो जाती है, कार्बन, नाईट्रोजन तथा फॉस्फोरस का अनुपात कम हो जाता है, और केंचुए नष्ट हो जाते हैं, जिस कारण भूमि की उर्वरक क्षमता खत्म हो जाती है।
उपसंचालक श्री देवके ने बताया कि नरवाई जलाने का कृत्य धारा 144 के तहत प्रतिबंधित है। नरवाई में आग लगाने पर पुलिस द्वारा प्रकरण भी कायम किया जाकर कठोर कार्यवाही की जायेगी। इस संबंध में मध्य प्रदेश शासन के नोटिफिकेशन 15 मई 2017 में निषेधात्मक निर्देश दिये गये हैं। निर्देशों के उल्लंघन किये जाने पर व्यक्ति, निकाय को नोटिफिकेशन प्रावधान अनुसार 02 एकड़ से कम भूमि रखने वाले को रूपये 2500/- प्रति घटना पर्यावरण क्षतिपूर्ति, 02 से 05 एकड़ भूमि रखने वाले को रूपये 5000/-प्रति घटना क्षतिपूर्ति एवं 05 एकड़ से अधिक भूमि रखने वाले को रूपये 15000/-प्रति घटना, पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि देना होगी। उपसंचालक कृषि श्री देवके ने समस्त किसानों से अपील की है कि नरवाई न जलाते हुए, कृषि यंत्र कंबाईन हार्वेस्टक के साथ स्ट्रा 2 रीपर व रीपर कम बाईंडर का उपयोग कर कटाई करके भूसा तैयार कर, खेतों की गहरी जुताई कर रोटावेटर चलाये।
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