पेटलावद क्षेत्र की शान लाल टमाटर की फसल खराब
आसमान छु रहे टमाटर के भाव, ग्रेंडिंग मशिन पड़ी बंद
पेटलावद (मनीष कुमट) - पेटलावद के देश विदेश में अपनी छाप छोडने वाला पेटलावद क्षेत्र का टमाटर इस बार अतिवृष्टी से खराब हो चुका है। इस वर्ष भारी बारिष से सोयाबीन, मक्का सहित क्षेत्र की शान लाल टमाटर अतिवृष्टि की भेंट चढ़ गया है। प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष टमाटर का किसानों की उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नही हुआ है। टमाटर का उत्पादन ज्यादा नहीं होने से मंडियों में टमाटर के भाव आसमान छू रहे हैं। किंतु किसानों के खेतों में टमाटर नजर नहीं आ रहे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष खेतो से 10 प्रतिशत उत्पादन हुआ है। टमाटर दिल्ली की मंडी में अच्छा टमाटर 800 रुपए कैरेट बिक रहा है, जबकि पिछले वर्ष यही टमाटर दिल्ली मंडी में 80 रुपए से 100 रुपए कैरेट में बिका था। जबकि पिछले वर्ष भाव काफी नीचे जा रहे थे और किसानों के खेतों में टमाटर सड़ रहे थे, यहां तक किसानों को टमाटर फेंकने पडे थे। अतिवृष्टि के कारण इस बार टमाटर के भाव आसमान छू रहे है, लेकिन किसानों के पास टमाटर नही है। कई बार देखा जाता है कि जब टमाटर की भरमार रहती है तो उनके भाव नहीं होते है, और जब टमाटर उत्पादन कम हो तो इनके भाव आसमान छु रहे है। इस वर्ष किसानों ने टमाटर ज्यादा उगाया है लेकिन ज्यादा बारिष से उत्पादन पर खासा प्रभाव पड़ा है। किसानों के खेतो में इस बार भी लगभग 1600 हेक्टेयर में टमाटर लगा हुआ है। बरसात के अंतिम समय मे अतिवृष्टि के कारण टमाटर की फ्लावरिग गिर गई है। जिससे उत्पादन नही हो पाया है। पेटलावद क्षेत्र का टमाटर भारत के बड़े महानगर दिल्ली, अहमदाबाद, कोटा, भोपाल, उज्जैन, जयपुर, रतलाम, बड़ोदा आदि महानगरों की मंडियों में बिकने जाता है।
ग्राम रायपूरिया के टमाटर सप्लायर डॉ. नाथुलाल पाटीदार, नानालाल पाटीदार, योगेश सेप्टा, गंगाराम धुलजी, अमृतलाल, रामेश्वरजी, गंगाराम राजाराम ने बताया कि इस बार ज्यादा बारिष के कारण टमाटर की फ्लावरिग गिर गई है, जिससे टमाटर का उत्पादन बहुत कम हुआ है। मुश्किल से 10 से 12 गाडि़या दिल्ली भेज रहीं है, जबकि गत वर्ष इन दिनों में हर रोज जिले से 80 से 100 गाडि़या टमाटर की भरकर दिल्ली सहित आसपास की सभी मंडियों में भेजते थे। वहीं 15 सितंबर से 15 अक्टूम्बर तक टमाटर का पहली सीजन रहती है, और भी किसानों ने टमाटर ने लगायें है, जिनका उत्पादन दिपावली के बाद बढ़ने की संभावना है। पेटलावद सहित आसपास के क्षेत्र के गांव रामनगर, बनी, रायपुरिया, जामली, बरवेट, बावड़ी, सारंगी, करवड़, रामगढ़, कोदली आदि ग्रामो में टमाटर का खासा उत्पादन होता है, लेकिन इस बार स्थिती अलग है।
ग्रेडिंग मशिन पड़ी बंद
किसानों के टमाटर की ग्रेंडिंग करने के लिए उघानिक विभाग कार्यालय में सन् 2009-10 में गें्रडिंग मशिन लगाई गई थी, जो अभी तक बंद पड़ी है। इस मशिन के द्वारा किसानों के टमाटर की ए ग्रेड, बी ग्रेड तथा सी ग्रेड तीन अलग-अलग छटनी होती है। लेकिन उक्त मशिन वर्षो से बंद पड़ी है।
किसान आयेंगे तो चालु होगी
इस संबंध में उघानिक विभाग के प्रभारी एसडीओं सुरेश इनवाती ने बताया कि वर्तमान में मशिन बंद पड़ी है, जब किसान आना शुरू हो जाऐंगे तो मशिन चालु कर दी जाएगी। हमने 500 किसानों का गु्रप बनाया था जिससे यहां टमाटर की पेकेजिंग करके टांसफर किया जाए लेकिन किसान नहीं आ रहे है। किसानों ने लगभग 1600 हैक्टेयर में टमाटर की फसल बोई है, जो कि अधिक बारिष के कारण नृष्ट हो गई है। वहीं रबी के टमाटर के अच्छे उत्पादन की संभावना है।
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