मौसम का बदला रूख, शीत लहरों ने ठंडी का करवाया आभास
ग्रामीण अंचलों में लहलहाने लगी खरीफ फसले, खरीज सीजन में इस बार मक्का को पहुंचा है नुकसान
झाबुआ (मनीष कुमट) - जिलेभर में पिछले करीब 3-4 दिनों से मौसम ने अचानक से करवट बदल ली है। मौसम पूरी तरह से सर्द होेने के साथ ही शीत लहरों का प्रकोप बढ़ गया हेै। लोगों को जर्बदस्त ठंडी का आभास होने लगा है। उधर इस वर्ष वर्षाकाल में हुई बारिष ने जहां मक्कस की फसल को प्रभावित किया है तो सोयाबीन एवं कपास की फसल बड़ी होकर लहलहाने लगी है।
जिले में पिछले करीब 3-4 दिनों से मौसम ने जो अचानक से करवट बदली है, इसको लेकर लोग भी आष्चर्यचकित है। अलसुबह से लेकर रात तक मौसम ठंडा रहने के साथ ही छांव ही रहती है, धूप निकलने का नाम नहीं ले रहंी है। दिनभर हवाएं चलने से लोग अपने परिवार में विषेष रूप से छोटे बच्चोें का ध्यान रखते हुए उन्हंे गर्म वस्त्र पहनाने के साथ बाहर निकलने से रोक रहे है, तो इस कारण मौसमी बिमारियों का प्रकोप भी कुछ हद तक बढ़ा है। इसके साथ ही बाजारों में गरमा-गरम जलेबी ओैर दूध की मांग बढ़ी है। अदरक वाली चाय लोगों को भाने लगी है।
इस बार जल्दी दस्तक दी है ठंड ने
प्रायः शीत ऋतु की दस्तक नवंबर माह के आधा पखवाड़े के बाद आरंभ होती है, लेकिन इस बार अक्टूबर माह के आधा पखवाड़े बाद से ठंड ने दस्तक देते हुए लोगांे को हेैरत में डाल दिया है वहीं बारिष का दौर इन दिनों पूरी तरह से थमा हुआ है। इसके साथ ही तापमान में भी तेजी से गिरावट आई है। मौसम विभाग के अनुसार मौसम में बदलाव से अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान मे ंगिरावट दर्ज की जा रहीं है। 24 अक्टूबर को अधिकतम तापमान जहां 25.7 डिग्री एवं न्यूनतम 18.8 डिग्री रेकार्ड किया गया था, वहीं 25 अक्टूबर को अधिकतम 30 डिग्री एवं न्यूनतम 17.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मप्र पर इस बार मेहरबान रहा है मानसून
यदि इस वर्ष हुई बारिष पर नजर डाली जाए, तो झाबुआ जिले ही नहीं अपितु संपूर्ण मप्र पर मानसून पूरी तरह से मेहरबान रहा है। जिसके कारण नदी-तालाबों एवं अन्य जलस्त्रोतों में भी पर्याप्त पानी भर गया है। मप्र में कई शहरों में तो इस बार सड़कों पर भारी जलजमाव के साथ बाढ़ की स्थिति भी निर्मित हुई है। कई जगहों पर अतिवृष्टि से खरीफ फसलों को काफी नुकसान भी पहुंचा हे। झाबुआ जिले की बात करे तो जिले के ग्रामीण अंचलों में खरीफ फसलों में मक्का को ज्यादा बारिष से नुकसान हुआ है, फसले मुरझाई है, वहीं कपास एवं सोयाबीन की फसल, जिसे पानी की आवष्यकता अधिक होती है, वह फसले अच्छी है। किसान वर्ग फसलों से कपास एवं सोयाबीन की कटाई कर इसे जिले की मडियों सहित बाजारों में अनाज व्यापारियों के यहां बेचने के लिए भी ला रहे है।
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