NH-30 और NH-135 पर किसका राज? पशु परिवहन से लेकर अवैध खनन तक, प्रशासन की निगरानी पर सवाल

NH-30 और NH-135 पर किसका राज? पशु परिवहन से लेकर अवैध खनन तक, प्रशासन की निगरानी पर सवाल

रीवा/मऊगंज। रीवा संभाग में अवैध पशु परिवहन, खनिज के अवैध उत्खनन और नशीले पदार्थों के कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों से गुजरने वाले संदिग्ध वाहनों, ओवरलोड हाइवा और पशुओं को अमानवीय तरीके से ले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से कथित अवैध नेटवर्क लगातार सक्रिय है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित आवागमन करने वाले ऐसे वाहनों की जांच और निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग आखिर कितने सक्रिय हैं?

दो मंजिला ट्रकों में पशु परिवहन के आरोप

संभाग से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर पशुओं के परिवहन को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कुछ ट्रकों में लकड़ी और लोहे के अतिरिक्त ढांचे बनाकर दो स्तर तैयार किए जाते हैं। इनमें बड़ी संख्या में बकरियों और अन्य पशुओं को एक साथ भरकर लंबी दूरी तक ले जाया जाता है। कुछ स्थानीय दावों में ऐसे वाहनों में 500 से 600 बकरियां तक ले जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इन संख्याओं और परिवहन की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

बताया जा रहा है कि पशुओं को रीवा संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की ओर ले जाया जाता है। हैदराबाद तक परिवहन किए जाने के दावे भी सामने आए हैं। NH-30 और NH-135 से होकर गुजरने वाले इन वाहनों की नियमित जांच की मांग उठ रही है। पशुओं को निर्धारित क्षमता से अधिक भरकर ले जाना पशु क्रूरता और सड़क सुरक्षा दोनों की दृष्टि से गंभीर मामला है।

छोटे मालवाहक वाहनों में भी क्षमता से अधिक लोडिंग

बड़े ट्रकों के अलावा छोटे मालवाहक वाहन भी सवालों के घेरे में हैं। स्थानीय स्तर पर टाटा एस जैसे वाहनों में भैंसों और अन्य पशुओं को क्षमता से अधिक भरकर ले जाने की शिकायतें मिल रही हैं। कुछ आरोपों में एक वाहन में 15 से 20 भैंसें तक लादने की बात कही गई है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह पशुओं के साथ क्रूरता के साथ-साथ सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा है।

पशु परिवहन के साथ गोवंश और छोटे बछड़ों को भी अवैध तरीके से ले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में हुई कुछ पुलिस कार्रवाइयों के आधार पर अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। ऐसे मामलों में परिवहन के दस्तावेज, पशुओं की संख्या, वाहन की क्षमता और संबंधित अनुमति की जांच जरूरी है।

RTO और स्थानीय थानों की निगरानी पर सवाल

स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर सामने आ रहे वीडियो के बाद परिवहन विभाग तथा मार्ग में पड़ने वाले पुलिस थानों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि लंबे समय तक एक ही मार्ग से संदिग्ध और क्षमता से अधिक लदे वाहन गुजर रहे हैं तो उनकी जांच क्यों नहीं हो रही? हालांकि किसी अधिकारी या विभाग की मिलीभगत के आरोपों की पुष्टि बिना निष्पक्ष जांच के नहीं की जा सकती।

वाहनों की तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं की चोरी की शिकायतों को भी गंभीरता से लेते हुए पुलिस को उनकी जांच करनी चाहिए, ताकि चोरी और अवैध परिवहन के बीच कोई संबंध होने पर उसका खुलासा हो सके।

अवैध खनन और ओवरलोड हाइवा से सड़कें बेहाल

संभाग में खनिज के अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर भी लगातार शिकायतें उठती रही हैं। पत्थर, पटिया, गिट्टी, मौरंग और मिट्टी के उत्खनन तथा परिवहन में वैध अनुमति के पालन की जांच की मांग की जा रही है। आरोप है कि कई क्षेत्रों में ओवरलोड हाइवा और भारी वाहन सड़कों से गुजरते हैं, जिससे मुख्य मार्गों के साथ ग्रामीण सड़कों को भी नुकसान पहुंच रहा है।

करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव आम नागरिकों के लिए परेशानी बन रहा है। ऐसे में खनिज विभाग, परिवहन विभाग और पुलिस को संयुक्त रूप से वाहनों की जांच, वजन और परिवहन दस्तावेजों का सत्यापन करना चाहिए। अवैध उत्खनन और ओवरलोड परिवहन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई आवश्यक है।

नशीली कफ सिरप और अवैध शराब का नेटवर्क भी चिंता का विषय

पशु परिवहन और खनिज गतिविधियों के अलावा संभाग में अवैध शराब तथा कोडीन युक्त प्रतिबंधित कफ सिरप के कारोबार को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। नशीले पदार्थों की आपूर्ति और वितरण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस एवं संबंधित विभागों को लगातार अभियान चलाने की जरूरत है। केवल छिटपुट कार्रवाई के बजाय आपूर्ति श्रृंखला और कारोबार से जुड़े लोगों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

कार्रवाई के बाद फिर सक्रियता के आरोप, स्थायी निगरानी की जरूरत

स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में पुलिस की सख्त कार्रवाइयों के दौरान संदिग्ध वाहनों की जब्ती से अवैध गतिविधियों पर कुछ समय के लिए अंकुश लगा था। लेकिन कार्रवाई में निरंतरता नहीं रहने से ऐसी गतिविधियों के दोबारा सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ रसूखदार लोगों का संरक्षण ऐसे कारोबार को बढ़ावा दे सकता है। इन आरोपों की जांच और प्रमाणों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।

प्रशासन से उठ रहे पांच बड़े सवाल

  • NH-30 और NH-135 पर पशुओं से भरे संदिग्ध वाहनों की नियमित जांच कितनी हो रही है?

  • पशु परिवहन के दौरान वाहन क्षमता और पशु कल्याण संबंधी नियमों का पालन कौन सुनिश्चित कर रहा है?

  • अवैध खनन और ओवरलोड वाहनों के विरुद्ध कितनी नियमित कार्रवाई की जा रही है?

  • पशु चोरी और अंतरराज्यीय अवैध परिवहन की शिकायतों की जांच के लिए क्या कोई समन्वित व्यवस्था है?

  • अवैध शराब और नशीली कफ सिरप के कारोबार की आपूर्ति श्रृंखला पर कार्रवाई कब तक प्रभावी होगी?

रीवा संभाग में इन शिकायतों को देखते हुए पुलिस, परिवहन, खनिज और पशुपालन विभाग की संयुक्त एवं निष्पक्ष जांच जरूरी है। किसी व्यक्ति या अधिकारी को बिना प्रमाण दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन केवल शिकायत आने पर कार्रवाई करने के बजाय नियमित निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था बनाए, ताकि पशु क्रूरता, अवैध खनन और नशीले पदार्थों के कारोबार पर स्थायी रूप से अंकुश लगाया जा सके।

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