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| बिलों में स्वच्छता, सड़कों पर गंदगी! रीवा संभाग में सफाई व्यवस्था की खुली पोल |
रीवा। स्वच्छता अभियान के नाम पर बड़े पैमाने पर सामग्री की खरीदी और बजट खर्च किए जाने के बावजूद यदि गांवों की गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरे के ढेर नजर आएं, तो व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। रीवा संभाग में स्वच्छता अभियान की जमीनी स्थिति को लेकर अब ऐसे ही सवाल सामने आ रहे हैं। डस्टबिन, सफाई उपकरण और अन्य संसाधनों की खरीदी के बाद भी अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं देने से खर्च और उसके वास्तविक उपयोग की समीक्षा की मांग उठने लगी है।
जनता की ओर से भेजे गए वीडियो और तस्वीरें ग्राम पंचायत गढ़, जनपद पंचायत गंगेव, तहसील मनगवां, जिला रीवा की बताई जा रही हैं। इनमें विभिन्न स्थानों पर कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आई इन तस्वीरों ने सरकारी स्वच्छता अभियानों और जमीनी हालात के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि कुछ समय तक गांव में सफाई वाहन नियमित रूप से घूमते रहे और एक-दो सप्ताह तक सफाई व्यवस्था सक्रिय भी दिखाई दी, लेकिन इसके बाद गतिविधियां धीमी पड़ गईं। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर फिर से कचरा जमा होने लगा। यदि यह स्थिति लगातार बनी हुई है, तो यह केवल सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता का नहीं, बल्कि नियमित निगरानी और जवाबदेही का भी विषय है।
खरीदी हुई, लेकिन संसाधनों का उपयोग कहां?
स्वच्छता अभियान के तहत डस्टबिन, सफाई उपकरण और अन्य सामग्री की खरीदी की गई। ऐसे में सवाल उठता है कि खरीदी गई सामग्री का उपयोग किन स्थानों पर किया जा रहा है? सफाई वाहनों का संचालन तय समय-सारणी के अनुसार हो रहा है या नहीं? कचरा संग्रहण और उसके निस्तारण की नियमित व्यवस्था किसके जिम्मे है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों और पंचायत स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।
सफाई व्यवस्था को लेकर खरीदी, बिलों और संभावित कमीशनखोरी के आरोप भी चर्चा में हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और दस्तावेजी जांच आवश्यक है। संबंधित सामग्री की खरीदी, भुगतान, वितरण और वास्तविक उपयोग का रिकॉर्ड सामने आने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सिर्फ अभियान नहीं, नियमित व्यवस्था जरूरी
स्वच्छता की समस्या केवल ग्राम पंचायत गढ़ तक सीमित नहीं मानी जा सकती। राष्ट्रीय राजमार्गों, बाजारों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरा जमा होने की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रहती हैं। ऐसे में जरूरी है कि सफाई अभियान को किसी विशेष अवधि या निरीक्षण तक सीमित रखने के बजाय नियमित व्यवस्था के रूप में संचालित किया जाए।
इसमें नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फेंकना और निर्धारित स्थानों पर ही कचरे का निस्तारण करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। लेकिन नागरिकों से सहयोग की अपेक्षा करने के साथ प्रशासन को भी नियमित सफाई, कचरा संग्रहण और संसाधनों के उचित उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
अब खर्च और काम का होगा हिसाब?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्वच्छता के नाम पर खर्च किए गए बजट और खरीदी गई सामग्री का वास्तविक लाभ जनता को क्यों नहीं मिल रहा है? संबंधित विभागों को ग्राम पंचायत गढ़ सहित प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कराना चाहिए। खरीदी गई सामग्री का भौतिक सत्यापन, सफाई वाहनों के संचालन का रिकॉर्ड और कचरा निस्तारण की व्यवस्था की समीक्षा भी जरूरी है।
स्वच्छता अभियान की सफलता सरकारी फाइलों, बिलों और खरीदी के आंकड़ों से नहीं, बल्कि साफ-सुथरी गलियों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों से तय होती है। जब तक नियमित सफाई और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक स्वच्छ संभाग का लक्ष्य केवल दावों तक सीमित रहने का खतरा बना रहेगा।
