धान पंजीयन पर खाद्य विभाग की सुस्ती! CSC संचालकों के आवेदन सत्यापन में अटके, 10 अक्टूबर अंतिम तारीख

धान पंजीयन पर खाद्य विभाग की सुस्ती! CSC संचालकों के आवेदन सत्यापन में अटके, 10 अक्टूबर अंतिम तारीख

रीवा। किसानों को गांव में ही शासकीय सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित CSC एवं अटल सेवा केंद्रों के माध्यम से धान पंजीयन की सुविधा उपलब्ध कराई जानी है। इसके लिए कई CSC संचालकों ने खाद्य विभाग के समक्ष आवेदन किए हैं, लेकिन संचालकों के अनुसार कई केंद्रों का सत्यापन अब तक पूरा नहीं हुआ है। इसके चलते संबंधित केंद्रों पर धान पंजीयन की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है।

धान पंजीयन की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर 2026 निर्धारित है। अंतिम तारीख में अब बेहद कम समय शेष है, ऐसे में सत्यापन प्रक्रिया लंबित रहने से CSC संचालकों के साथ-साथ किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। सवाल यह उठ रहा है कि जब पंजीयन की अंतिम तारीख पहले से तय थी और CSC संचालकों ने समय रहते आवेदन कर दिए थे, तो सत्यापन प्रक्रिया समय पर पूरी क्यों नहीं की गई?

गांव के किसानों पर पड़ सकता है असर

CSC केंद्रों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनके गांव अथवा आसपास ही विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है। यदि किसी गांव में अधिकृत CSC केंद्र पर धान पंजीयन की सुविधा शुरू नहीं हो पाती है तो किसानों को दूसरे स्थानों पर जाना पड़ सकता है। अंतिम दिनों में पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति भी बन सकती है।

CSC संचालकों का कहना है कि शासन ने ग्रामीणों की सुविधा के लिए गांव-गांव में सेवा केंद्र स्थापित किए हैं। ऐसे में यदि पात्र केंद्रों को समय पर धान पंजीयन की सुविधा नहीं मिलती है तो पूरी व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित होता है।

सत्यापन में देरी पर सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल विभागीय प्रक्रिया को लेकर है। जब धान पंजीयन की अंतिम तारीख पहले से निर्धारित थी, तो आवेदन करने वाले CSC केंद्रों का सत्यापन समय रहते क्यों नहीं किया गया? क्या विभाग द्वारा लंबित आवेदनों की समीक्षा की जा रही है? क्या अंतिम तारीख से पहले सभी पात्र केंद्रों को पंजीयन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी?

CSC संचालकों ने मांग की है कि लंबित आवेदनों का तत्काल सत्यापन कराया जाए और पात्र केंद्रों को जल्द से जल्द धान पंजीयन की सुविधा शुरू करने की अनुमति दी जाए, ताकि किसानों को अंतिम समय में परेशानी का सामना न करना पड़े।

अधिकारी से पक्ष जानने का प्रयास, स्पष्ट जवाब नहीं मिला

इस मामले को लेकर दैनिक रघुवंशम् समाचार पत्र के सह-संपादक अमरीश पटेल ने जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी कमलेश तांडेकर तथा ऑपरेटर शिवपूजन सिंह से संपर्क कर CSC केंद्रों के लंबित सत्यापन और धान पंजीयन की सुविधा शुरू नहीं होने के संबंध में विभाग का पक्ष जानने का प्रयास किया।

खबर के अनुसार, संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट एवं संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। हालांकि विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने पर उसे भी खबर में शामिल किया जा सकता है।

अब विभाग की कार्रवाई पर नजर

धान पंजीयन की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर है। ऐसे में समय तेजी से निकल रहा है। किसानों की सुविधा को देखते हुए लंबित सत्यापन प्रक्रिया जल्द पूरी करना जरूरी है। अब देखना होगा कि अंतिम तारीख से पहले खाद्य विभाग लंबित आवेदनों पर कार्रवाई कर पात्र CSC केंद्रों को पंजीयन की सुविधा उपलब्ध कराता है या नहीं।

फिलहाल मामला किसानों की सुविधा, CSC संचालकों के लंबित आवेदनों और विभागीय सत्यापन प्रक्रिया के बीच उलझा हुआ है। यदि समय रहते व्यवस्था सक्रिय नहीं हुई तो इसका असर उन किसानों पर पड़ सकता है, जो अपनी उपज का पंजीयन कराने के लिए गांव स्तर की सुविधा पर निर्भर हैं।

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