राजनीतिक काफिले में यातायात नियमों के पालन पर सवाल, आम वाहन चालकों के लिए नियम सख्त तो रैली में क्यों ढिलाई?

राजनीतिक काफिले में यातायात नियमों के पालन पर सवाल, आम वाहन चालकों के लिए नियम सख्त तो रैली में क्यों ढिलाई?

रीवा/मऊगंज। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के रीवा एवं मऊगंज प्रवास के दौरान निकली वाहन रैली और काफिले को लेकर यातायात नियमों के पालन पर सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश अध्यक्ष के रीवा आगमन पर रोड शो और मऊगंज में हुए स्वागत कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं समर्थक शामिल हुए। इसी दौरान यातायात व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है।

दरअसल, रीवा शहर सहित विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस द्वारा लगातार वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान दोपहिया वाहन चालकों से हेलमेट, ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन के आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाती है। वहीं चारपहिया वाहनों में सीट बेल्ट के पालन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाती है।

रीवा में 28 सितंबर से 8 अक्टूबर तक विशेष वाहन चेकिंग एवं जनजागरूकता अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई है। अभियान का उद्देश्य वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया है। ऐसे में 5 अक्टूबर को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत के दौरान निकले वाहन काफिले में यदि कुछ दोपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट नजर आए, तो यातायात व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

क्या राजनीतिक आयोजनों में भी नियमों का पालन हुआ?

सवाल किसी राजनीतिक दल की रैली या कार्यक्रम को लेकर नहीं, बल्कि यातायात नियमों के समान रूप से लागू होने को लेकर है। आम वाहन चालक से हेलमेट, लाइसेंस और वाहन के दस्तावेज मांगे जाते हैं। दस्तावेज पूरे नहीं होने पर चालानी कार्रवाई की जाती है। चारपहिया वाहन चालकों को सीट बेल्ट लगाने के लिए लगातार जागरूक किया जाता है। ऐसे में बड़े राजनीतिक आयोजनों और वाहन काफिलों के दौरान भी इन्हीं नियमों का पालन सुनिश्चित होना जरूरी है।

यदि किसी आयोजन के दौरान यातायात नियमों के उल्लंघन की स्थिति बनी है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि यातायात पुलिस ने मौके पर क्या व्यवस्था की थी और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

आम लोगों के मन में उठ रहा सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यातायात नियम किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या वर्ग के लिए अलग-अलग नहीं होने चाहिए। यदि आम नागरिक के लिए हेलमेट और सीट बेल्ट अनिवार्य है तो राजनीतिक रैली और काफिले में शामिल वाहनों पर भी समान नियम लागू होने चाहिए। इससे कानून के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होगा।

वाहन चेकिंग अभियान का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि छोटे-बड़े सभी आयोजनों में यातायात नियमों का पालन कराया जाए।

प्रशासन से स्पष्टता की अपेक्षा

अब सवाल यह है कि 5 अक्टूबर को रीवा एवं मऊगंज में हुए रोड शो और वाहन काफिले के दौरान यातायात पुलिस ने क्या व्यवस्था की थी। क्या काफिले में शामिल दोपहिया वाहन चालकों के हेलमेट और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई? यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ तो क्या नियमानुसार कार्रवाई की गई?

इन सवालों पर प्रशासन और यातायात पुलिस की स्थिति स्पष्ट होने से यह संदेश जाएगा कि सड़क पर लागू यातायात नियम सभी नागरिकों के लिए समान हैं। कानून का समान रूप से पालन ही सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था में जनता के भरोसे को मजबूत कर सकता है।




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