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| बिछिया पुलिस की गांजा कार्रवाई पर सवाल, CCTV फुटेज से सामने आ सकती है सच्चाई |
रीवा। जिले के बिछिया थाना क्षेत्र में गांजा बरामदगी और एनडीपीएस एक्ट के तहत की गई कार्रवाई को लेकर विवाद सामने आया है। मामले में पांच लोगों को हिरासत में लेने, उनमें से तीन को कथित तौर पर छोड़ने और दो लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। आरोपी जावेद अहमद की पत्नी स्वलेहा बेगम ने इस संबंध में पुलिस महानिरीक्षक (IG) और पुलिस अधीक्षक (SP) को शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, पुलिस का कहना है कि दो आरोपियों को गांजे के साथ पकड़ा गया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है।
घर से थाने ले जाने का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, 11 अक्टूबर की शाम पुलिस उनके घर पहुंची थी। महिला का आरोप है कि तलाशी के दौरान कुछ नहीं मिलने के बावजूद पांच लोगों को थाने ले जाया गया। उन्होंने हिरासत के दौरान कथित मारपीट और सौदेबाजी के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि घटनाक्रम से संबंधित CCTV फुटेज उपलब्ध हैं। ऐसे में फुटेज की जांच से पुलिस की कार्रवाई, लोगों को हिरासत में लिए जाने और बाद में हुई घटनाओं की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
पुलिस ने कही दो आरोपियों को पकड़ने की बात
दूसरी ओर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भावना मरावी के मुताबिक, पुलिस ने गांजे के साथ दो आरोपियों को पकड़ा है। परिजनों की ओर से दिखाए गए वीडियो फुटेज के आधार पर लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है।
इस मामले में CCTV फुटेज, थाने के रिकॉर्ड, गांजे की बरामदगी से संबंधित दस्तावेज, जब्ती प्रक्रिया और संबंधित व्यक्तियों के बयान अहम हो सकते हैं। जांच में इन सभी पहलुओं का परीक्षण होने से घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
मनगवां और सुहागी थानों को लेकर भी उठे सवाल
बिछिया प्रकरण के साथ ही रीवा और नवीन मऊगंज जिले के कुछ अन्य थाना क्षेत्रों में एनडीपीएस एक्ट से संबंधित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी कथित वसूली की शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है। इन शिकायतों में आरोप लगाया जाता है कि कुछ मामलों में कार्रवाई का भय दिखाकर पैसों की मांग की जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों में मनगवां थाना और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे सुहागी थाना क्षेत्र का भी उल्लेख किया जा रहा है। यदि इन क्षेत्रों में पुलिस कार्रवाई में अनियमितता या कथित वसूली से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुई हैं, तो उनकी अलग-अलग जांच की जानी चाहिए। बिना ठोस साक्ष्य किसी पुलिसकर्मी या पूरे थाने को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी वास्तविक स्थिति
एनडीपीएस एक्ट के तहत नशीले पदार्थों के मामलों में पुलिस कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन प्रत्येक कार्रवाई कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए। इसी तरह, गलत तरीके से फंसाने, हिरासत में मारपीट या कार्रवाई के नाम पर पैसों की मांग जैसे आरोप सामने आने पर उनकी निष्पक्ष जांच भी जरूरी है।
बिछिया थाना प्रकरण में प्रमुख सवाल यह है कि क्या CCTV फुटेज और पुलिस रिकॉर्ड से पांच लोगों को हिरासत में लेने तथा तीन को कथित तौर पर छोड़ने के आरोपों की पुष्टि होती है? क्या कथित मारपीट और सौदेबाजी के आरोपों के समर्थन में कोई साक्ष्य मिलता है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल, शिकायतकर्ता ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है और पुलिस की ओर से भी आरोपों की जांच किए जाने की बात कही गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है। निष्पक्ष जांच से न केवल आरोपों की सच्चाई स्पष्ट होगी, बल्कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और निर्दोष लोगों के अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।
