रीवा-मऊगंज में पेट्रोल-डीजल की कथित अवैध बिक्री पर सवाल, गढ़-कटरा की आगजनी के बाद जांच की मांग

रीवा-मऊगंज में पेट्रोल-डीजल की कथित अवैध बिक्री पर सवाल, गढ़-कटरा की आगजनी के बाद जांच की मांग

रीवा/मऊगंज। रीवा और नवीन मऊगंज जिले में पेट्रोल-डीजल की कथित अवैध बिक्री तथा घरेलू गैस सिलेंडरों के अनधिकृत भंडारण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी और लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, कुछ गांवों, बाजारों, चौराहों और रिहायशी इलाकों में बोतलों में पेट्रोल-डीजल बेचने की गतिविधियां संचालित होने की आशंका जताई जा रही है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित स्थानों का सर्वेक्षण कराने की मांग उठ रही है।

इस मामले में गढ़ और कटरा क्षेत्र में पूर्व में हुई आगजनी की घटनाओं का भी उल्लेख किया जा रहा है। इन घटनाओं ने ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई है। हालांकि, इन घटनाओं के कारणों और वर्तमान में लगाए जा रहे आरोपों के बीच संबंध की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

बोतलों में पेट्रोल-डीजल की बिक्री की जांच जरूरी

स्थानीय स्तर पर किए जा रहे दावों में रीवा और मऊगंज जिलों में लगभग चार हजार छोटी-बड़ी दुकानों पर बोतलों में पेट्रोल-डीजल बेचने का अनुमान जताया गया है। इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए वास्तविक स्थिति जानने के लिए प्रशासनिक सर्वेक्षण और स्थलीय जांच आवश्यक है।

यदि रिहायशी बस्तियों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में पेट्रोल-डीजल का भंडारण निर्धारित सुरक्षा मानकों के विपरीत किया जा रहा है, तो इससे आग लगने और उसके आसपास फैलने का खतरा हो सकता है। संबंधित विभागों को ऐसे स्थानों की पहचान कर लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

गढ़ और कटरा की आगजनी से सुरक्षा पर चिंता

गढ़ और कटरा में पूर्व में हुई आगजनी की घटनाओं का हवाला देते हुए स्थानीय स्तर पर ज्वलनशील पदार्थों के सुरक्षित भंडारण की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। ऐसी घटनाएं इस बात की याद दिलाती हैं कि पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडरों के रखरखाव में सुरक्षा नियमों का पालन कितना महत्वपूर्ण है।

प्रशासन को इन घटनाओं से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड की समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संवेदनशील क्षेत्रों में ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण सुरक्षित तरीके से हो रहा है या नहीं। साथ ही, वर्तमान शिकायतों की जांच करके संभावित जोखिम वाले स्थानों पर आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

घरेलू गैस सिलेंडरों की कथित कालाबाजारी का मामला

पेट्रोल-डीजल की कथित अवैध बिक्री के साथ घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी के आरोप भी सामने आ रहे हैं। शिकायतों में घरेलू और उज्ज्वला योजना के अंतर्गत दिए गए सिलेंडरों की कथित अवैध बिक्री तथा कुछ स्थानों पर अधिक संख्या में सिलेंडर रखे जाने की आशंका जताई गई है।

स्थानीय दावों में सिलेंडरों को 1600 से 2000 रुपये तक में बेचे जाने की बात भी कही जा रही है, लेकिन इन कीमतों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित गैस एजेंसियों और आपूर्ति विभाग को वितरण रिकॉर्ड, उपभोक्ता विवरण तथा संदिग्ध भंडारण की जांच करनी चाहिए। अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

पुलिस और संबंधित विभागों की निगरानी पर सवाल

इस मामले में स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग तथा संबंधित तेल कंपनियों की निगरानी व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह पता लगाया जाना चाहिए कि पूर्व में इस संबंध में शिकायतें मिली थीं या नहीं और यदि मिली थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई की गई।

अवैध वसूली को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दावा किया जा रहा है। हालांकि, फिलहाल ऐसे आरोपों के समर्थन में पुष्ट प्रमाण सामने नहीं हैं। यदि किसी व्यक्ति ने लिखित शिकायत दी है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

संयुक्त जांच अभियान चलाने की मांग

रीवा और मऊगंज में पेट्रोल-डीजल की कथित अवैध बिक्री, गैस सिलेंडरों के संभावित अनधिकृत भंडारण और सुरक्षा नियमों के पालन की स्थिति स्पष्ट करने के लिए संयुक्त जांच अभियान चलाने की मांग की जा रही है। जांच में संदिग्ध दुकानों और स्थानों का सर्वेक्षण, संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन तथा सुरक्षा मानकों की पड़ताल शामिल होनी चाहिए।

ज्वलनशील पदार्थों से जुड़ी लापरवाही लोगों की जान-माल के लिए खतरा बन सकती है। ऐसे में गढ़ और कटरा की पूर्व घटनाओं सहित उपलब्ध शिकायतों की समीक्षा कर प्रशासन को वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए। यदि अवैध बिक्री, असुरक्षित भंडारण या किसी स्तर पर नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है।

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