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| रीवा-मऊगंज में आंगनबाड़ी पोषण आहार पर उठे सवाल, 2400 केंद्रों की जांच की मांग |
रीवा/मऊगंज। रीवा और मऊगंज जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की पोषण आहार व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नाश्ता वितरण, निर्धारित मेनू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराने और उसकी गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद केंद्रों की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। शिकायतों में सरकारी अभिलेखों में दर्ज जानकारी और लाभार्थियों को वास्तव में मिल रही सुविधाओं के बीच अंतर होने की आशंका जताई गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों जिलों में लगभग 2400 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों के माध्यम से तीन से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं सहित पात्र हितग्राहियों तक पोषण संबंधी सेवाएं पहुंचाई जाती हैं। इस व्यवस्था पर शासन द्वारा राशि खर्च की जाती है, ताकि बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हो और महिलाओं को आवश्यक पोषण मिल सके।
नाश्ता और भोजन के निर्धारित मेनू पर सवाल
शिकायतों के अनुसार, कुछ केंद्रों पर नियमित नाश्ता वितरण नहीं होने और निर्धारित मेनू के अनुरूप भोजन उपलब्ध नहीं कराने के आरोप लगाए जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर भोजन में दाल-चावल तक सीमित रहने तथा सब्जी और अन्य पौष्टिक सामग्री की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि, इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित केंद्रों में भोजन वितरण रजिस्टर, लाभार्थियों की उपस्थिति, मेनू चार्ट और खाद्य सामग्री की उपलब्धता का भौतिक सत्यापन जरूरी है।
समूहों के संचालन और भुगतान की जांच जरूरी
शिकायतों में कुछ समूहों द्वारा एक से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भोजन तैयार करने तथा सीमित रसोइयों के माध्यम से व्यवस्था संचालित किए जाने के आरोप भी शामिल हैं। कुछ कार्यकर्ताओं और समूहों के बीच कथित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
इन आरोपों की पुष्टि के लिए समूहों से संबंधित दस्तावेज, कार्य आवंटन, भुगतान विवरण और भोजन आपूर्ति की वास्तविक स्थिति की जांच की जानी चाहिए। केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति या समूह को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
निरीक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल
आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी के लिए विभागीय अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों की व्यवस्था है। ऐसे में शिकायतें सामने आने पर यह देखना जरूरी है कि नियमित निरीक्षण कितनी प्रभावशीलता से किए जा रहे हैं। निरीक्षण रिपोर्ट और वास्तविक परिस्थितियों का मिलान करने से व्यवस्था में संभावित कमियों का पता लगाया जा सकता है।
औचक जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
रीवा और मऊगंज के आंगनबाड़ी केंद्रों में औचक निरीक्षण, भोजन की गुणवत्ता की जांच और भुगतान अभिलेखों के सत्यापन की मांग उठ रही है। जांच में यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
आंगनबाड़ी पोषण आहार योजना का उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों और महिलाओं तक पौष्टिक भोजन पहुंचाना है। इसलिए योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, नियमित निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। अब संबंधित विभाग की जांच और कार्रवाई से ही स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और व्यवस्था में सुधार के लिए किन कदमों की आवश्यकता है।
