हनुमना में तबादले के बाद भी अधिकारी के जमे रहने का आरोप, वेतन भुगतान पर उठे सवाल

हनुमना में तबादले के बाद भी अधिकारी के जमे रहने का आरोप, वेतन भुगतान पर उठे सवाल

मऊगंज। जनपद पंचायत हनुमना में अधिकारियों की पदस्थापना, वेतन भुगतान और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय निवासी एवं शिकायतकर्ता जैलेंद्र सिंह बन्ना ने विकासखंड समन्वयक आवास प्रतिभा सिंह पटेल और सहायक लेखा अधिकारी वसंतलाल पटेल के संबंध में लोकायुक्त कार्यालय भोपाल में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में स्थानांतरण आदेश के पालन, वेतन आहरण और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

स्थानांतरण के बाद भी हनुमना में पदस्थ रहने का आरोप

शिकायतकर्ता के अनुसार, प्रतिभा सिंह पटेल की मूल पदस्थापना जनपद पंचायत सिरमौर, जिला रीवा में थी, जबकि उनके हनुमना में कार्य करने पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि उनका वेतन और मानदेय सिरमौर से आहरित होता रहा। साथ ही, विकास आयुक्त कार्यालय के आदेश से उनका स्थानांतरण जनपद पंचायत चावरपाठा, जिला नरसिंहपुर किए जाने के बावजूद उन्हें हनुमना से कार्यमुक्त नहीं किया गया।

इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित पदस्थापना आदेश, कार्यमुक्ति संबंधी अभिलेख और वेतन भुगतान के रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फर्मों के बिल और आवास योजना पर भी आरोप

शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि प्रतिभा सिंह पटेल की पुत्री के नाम से पंजीकृत 'प्राणवी ट्रेडर्स' और उनके देवर के नाम से संचालित बताए गए 'अनिलेश ट्रेडर्स' के माध्यम से कथित तौर पर कूटरचित बिलों के जरिए भुगतान प्राप्त किया गया। शिकायतकर्ता ने करोड़ों रुपये के भुगतान और उनकी वैधता की जांच कराने की मांग की है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए बिल, भुगतान अभिलेख, कार्यादेश और संबंधित फर्मों की भूमिका की जांच आवश्यक है।

इसके अलावा गौरी, पटेहरा, भगदेवा, बरांव, गाड़ा और करकचहा सहित ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में गड़बड़ियों का आरोप लगाया गया है। शिकायत के मुताबिक, कुछ मामलों में आवास निर्माण पूरा हुए बिना ही राशि वितरित किए जाने की आशंका है। इसकी पुष्टि भौतिक सत्यापन और योजना से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की जांच से ही हो सकती है।

लोकायुक्त और कलेक्टर के पत्रों के बाद भी कार्रवाई पर सवाल

शिकायत में उल्लेख किया गया है कि 13 जनवरी 2025 को मध्य प्रदेश लोकायुक्त कार्यालय, भोपाल ने अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा मऊगंज कलेक्टर से तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन मांगा था। इसके बाद कलेक्टर द्वारा 23 मार्च, 6 मई और 10 जुलाई 2025 को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र जारी कर सात दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाने का दावा किया गया है।

शिकायतकर्ता का सवाल है कि निर्देशों के बावजूद जांच की स्थिति और संबंधित अधिकारी की पदस्थापना को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं हुई। हालांकि, जांच रिपोर्ट प्रस्तुत हुई या नहीं और वर्तमान में विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

अब मामले में संबंधित विभागों से अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा है। स्थानांतरण आदेश, वेतन भुगतान, कथित बिलों और आवास योजना के कार्यों की निष्पक्ष जांच से ही आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकेगी।

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