भवन बना, रास्ता नहीं! धान के खेतों के बीच आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मरीजों की परेशानी पर सवाल

भवन बना, रास्ता नहीं! धान के खेतों के बीच आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मरीजों की परेशानी पर सवाल


मऊगंज - सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, लेकिन मऊगंज जिले के नईगढ़ी क्षेत्र की ग्राम पंचायत पूर्वा में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। यहां स्वास्थ्य केंद्र का भवन तो बना दिया गया, लेकिन मुख्य मार्ग से करीब 100 मीटर दूर स्थित केंद्र तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता नहीं है। धान के खेतों के बीच घिरे इस स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में स्वास्थ्य केंद्र बनने से उन्हें स्थानीय स्तर पर इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन रास्ते की समुचित व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। बरसात के मौसम में खेतों के बीच से गुजरकर केंद्र तक पहुंचना और भी मुश्किल हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मरीजों के लिए अस्पताल तक पहुंचना ही आसान नहीं है, तो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ किस तरह ले पाएंगे?

स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति पर भी सवाल

मामला केवल रास्ते की अनुपलब्धता तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्यकर्मी सप्ताह में महज तीन दिन केंद्र पर आते हैं और कुछ घंटे बाद लौट जाते हैं। हालांकि, कर्मचारियों की उपस्थिति और सेवाओं की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो यह ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की नियमितता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।

भवन निर्माण के बाद सुविधाओं की जिम्मेदारी किसकी?

वर्तमान में विकास कार्यों में भवन निर्माण, उपकरणों की खरीद और आधारभूत ढांचे के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन केवल भवन बना देना ही बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की गारंटी नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने के लिए सुगम रास्ता, नियमित रूप से स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता, जरूरी दवाएं और समय पर उपचार भी उतने ही आवश्यक हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित स्वास्थ्य संस्थानों की उपयोगिता तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब निर्माण के साथ इन बुनियादी जरूरतों पर भी ध्यान दिया जाए।

मामले में क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. जी.एस. परिहार ने जांच कर कार्रवाई करने की बात कही है। अब निगाहें संबंधित विभाग पर हैं कि वह मौके की स्थिति का निरीक्षण कर रास्ते की समस्या दूर करने और स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।

पूर्वा का आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्रशासन के सामने एक बुनियादी सवाल रखता है—क्या विकास का आकलन केवल तैयार भवनों और खरीदे गए उपकरणों से किया जाएगा, या यह भी देखा जाएगा कि जरूरतमंद ग्रामीण वास्तव में उन सुविधाओं तक पहुंच पा रहे हैं या नहीं? ग्रामीणों को अब आश्वासन से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई का इंतजार है।

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