रीवा फर्जी नाम से संचालित नेत्र अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, सीलिंग के निर्देश!

रीवा फर्जी नाम से संचालित नेत्र अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, सीलिंग के निर्देश!

रीवा - चिकित्सा सेवा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में वैधानिकता और संस्थागत पारदर्शिता से किसी भी प्रकार का विचलन अब स्वास्थ्य विभाग की निगाह से ओझल नहीं रहेगा। हेडगवार नगर, वार्ड क्रमांक-17 स्थित एमआईजी क्षेत्र में कथित रूप से फर्जी नाम से संचालित किए जा रहे नेत्र अस्पताल के प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग ने कठोर प्रशासनिक रुख अपनाते हुए संबंधित संस्थान को सील करने के निर्देश जारी किए हैं। मामले में क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, रीवा संभाग डॉ. जी.एस. परिहार ने जांच प्रतिवेदन का परीक्षण करने के उपरांत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, रीवा को संबंधित संस्थान के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल सील करने तथा की गई कार्रवाई से अधोहस्ताक्षरी को अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।

शिकायत से जांच और फिर कार्रवाई तक पहुंचा मामला! 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विजय मिश्रा, तनय लालजी मिश्रा, निवासी मॉडल स्कूल के पास, खुटेही, रीवा द्वारा उक्त संस्थान के संबंध में शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत में हेडगवार नगर के वार्ड क्रमांक-17 स्थित एमआईजी क्षेत्र में फर्जी नाम से नेत्र अस्पताल संचालित किए जाने का आरोप लगाते हुए वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई थी। शिकायत के उपरांत स्वास्थ्य विभाग द्वारा मामले की जांच कराई गई। जांच दल ने 17 सितंबर 2026 को अपना जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। क्षेत्रीय संचालक द्वारा जांच प्रतिवेदन का परीक्षण किए जाने के बाद प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए सीएमएचओ रीवा को संबंधित संस्थान को सील करने के निर्देश दिए गए।

जांच रिपोर्ट पर प्रशासनिक निर्णय, सिर्फ कागजी खानापूर्ति नहीं! 

इस कार्रवाई का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि शिकायत को केवल पत्राचार की औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि जांच कराई गई और जांच प्रतिवेदन के आधार पर सक्षम स्तर से अगला प्रशासनिक कदम उठाया गया। चिकित्सा संस्थान के संचालन से जुड़े मामलों में पंजीयन, वैधानिक अनुमति, संस्थान का वास्तविक नाम, संचालन की प्रकृति तथा निर्धारित मानकों का अनुपालन जैसे विषय सीधे मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़े होते हैं। ऐसे में जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सीलिंग के निर्देश को स्वास्थ्य प्रशासन की नियामक भूमिका की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

डॉ. परिहार का रुख, नियम सर्वोपरि! 

क्षेत्रीय संचालक डॉ. जी.एस. परिहार द्वारा जांच प्रतिवेदन पर त्वरित संज्ञान लेते हुए सीएमएचओ को कार्रवाई के निर्देश दिए जाने से यह प्रशासनिक संदेश स्पष्ट होता है कि चिकित्सा संस्थानों की वैधानिकता से जुड़े मामलों को केवल फाइलों में लंबित रखने के बजाय अभिलेखीय परीक्षण और नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया तक ले जाना आवश्यक है। यह कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध निष्कर्ष नहीं, बल्कि उपलब्ध जांच प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय स्तर पर लिया गया प्रशासनिक निर्णय है। प्रकरण में आगे की वैधानिक कार्रवाई भी लागू नियमों एवं जांच में स्थापित तथ्यों के अनुरूप होगी।

अब सीएमएचओ कार्यालय पर अमल की जिम्मेदारी! 

क्षेत्रीय संचालक के निर्देश के बाद अब कार्रवाई का अगला चरण सीएमएचओ कार्यालय के स्तर पर है। संबंधित संस्थान को सील करने के साथ प्रकरण में लागू वैधानिक प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जानी है तथा की गई कार्रवाई की सूचना क्षेत्रीय संचालक कार्यालय को उपलब्ध कराई जानी है। नेत्र चिकित्सा जैसी संवेदनशील सेवा में संस्थान की वैधानिक पहचान और अनुमति केवल कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि मरीज के विश्वास और स्वास्थ्य सुरक्षा की आधारशिला है। ऐसे मामलों में नियामक तंत्र की सक्रियता ही यह सुनिश्चित करती है कि चिकित्सा सेवा के नाम पर नियमों की अनदेखी के लिए कोई प्रशासनिक अवकाश न रहे।

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