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| रीवा संभाग में नशा विरोधी अभियान: कार्रवाई अधिक, लेकिन बड़े नेटवर्क पर कब होगी निर्णायक चोट? |
रीवा - मध्य प्रदेश शासन द्वारा प्रदेशभर में नशे के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाए जाने के दावे किए जा रहे हैं। रीवा संभाग और विशेष रूप से रीवा जिले में भी पुलिस एवं आबकारी विभाग समय-समय पर गांजा, नशीली कफ सिरप, अवैध शराब तथा अन्य मादक पदार्थों के विरुद्ध कार्रवाई कर रहे हैं। लगातार प्रेस विज्ञप्तियां जारी होती हैं और बड़ी सफलता का दावा भी किया जाता है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों और आम नागरिकों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या इन कार्रवाइयों से वास्तव में नशे का संगठित कारोबार कमजोर हुआ है, या फिर केवल छोटे स्तर के मामलों तक ही कार्रवाई सीमित रह जाती है?
रीवा और मऊगंज जिले के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि देसी शराब, अंग्रेजी शराब तथा महुआ से तैयार होने वाली अवैध शराब का कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा है। लोगों का कहना है कि कई गांवों, कस्बों और चौराहों पर अवैध रूप से शराब की बिक्री किसी न किसी माध्यम से जारी रहती है, लेकिन इन नेटवर्कों तक पहुंचने वाली कार्रवाई बहुत कम दिखाई देती है।
स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि जब भी बड़ी मात्रा में अवैध शराब, गांजा, नशीली कफ सिरप या अन्य मादक पदार्थ पकड़े जाने की जानकारी सामने आती है, तब यह अपेक्षा रहती है कि जांच केवल बरामदगी तक सीमित न रहे, बल्कि यह भी सार्वजनिक किया जाए कि प्रतिबंधित सामग्री कहां से आई, इसकी आपूर्ति किसने की और इसके पीछे कौन-सा पूरा नेटवर्क सक्रिय था। यदि इन सवालों का जवाब सामने नहीं आता, तो कार्रवाई की प्रभावशीलता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठते हैं।
इसी प्रकार आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी ग्रामीण क्षेत्रों में कई तरह की चर्चाएं होती रहती हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि अवैध शराब की बिक्री वास्तव में व्यापक स्तर पर हो रही है, तो उसके स्रोतों और संरक्षण देने वाले तत्वों तक पहुंचना भी उतना ही आवश्यक है। केवल छोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई कर देने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा।
कुछ पुराने मामलों को लेकर भी समय-समय पर स्थानीय स्तर पर शिकायतें और चर्चाएं सामने आती रही हैं कि बरामदगी की मात्रा अथवा कार्रवाई की पारदर्शिता को लेकर संदेह व्यक्त किए गए। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऐसे मामलों में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होने से जनता का विश्वास अवश्य बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी बड़े मामले में गिरफ्तार आरोपियों से निष्पक्ष पूछताछ, आर्थिक लेन-देन की जांच, आपूर्ति श्रृंखला का विश्लेषण तथा आवश्यक होने पर स्वतंत्र एजेंसी द्वारा विवेचना कराई जाए, तो नशे के संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है। इससे केवल छोटे स्तर के कारोबारियों पर नहीं, बल्कि पूरे अवैध तंत्र पर प्रभावी कार्रवाई संभव होगी।
नशा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज और युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसलिए आवश्यक है कि नशा विरोधी अभियान केवल आंकड़ों और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित न रहे, बल्कि उसके परिणाम धरातल पर भी स्पष्ट दिखाई दें। जनता की अपेक्षा है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी भेदभाव के हो तथा यदि किसी सरकारी कर्मचारी, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के विश्वसनीय प्रमाण मिलते हैं, तो उनके विरुद्ध भी कानून के अनुसार समान रूप से कठोर कार्रवाई की जाए। तभी नशा मुक्त समाज का लक्ष्य वास्तविक रूप से साकार हो सकेगा।
