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| जर्जर भवन का छज्जा गिरा, युवक की मौत; शव रखकर कलेक्ट्रेट के सामने चक्काजाम |
रीवा - कृषि विभाग के जर्जर भवन का छज्जा गिरने से युवक की मौत के बाद बुधवार को परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और सड़क पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। परिजनों ने मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता देने और जर्जर भवनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। करीब काफी देर तक चले प्रदर्शन के बाद प्रशासन की ओर से 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का आश्वासन दिए जाने पर परिजन चक्काजाम समाप्त करने को तैयार हुए।
जानकारी के अनुसार बहुरी बांध निवासी राकेश उपाध्याय बुधवार रात तेज बारिश के दौरान एक दुकान के नीचे खड़े थे। इसी दौरान कृषि विभाग के जर्जर भवन का छज्जा अचानक भरभराकर उनके ऊपर गिर गया। हादसे में राकेश गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई।
हादसे की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और सड़क पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने जर्जर भवनों की स्थिति पर नाराजगी जताई और जिम्मेदार विभाग के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
चक्काजाम की सूचना मिलने पर प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर उनकी मांगें सुनीं। तहसीलदार अनुपम पांडेय ने परिजनों को बताया कि RBC 6-4 के तहत 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान है। उन्होंने जरूरी दस्तावेज पूरे कराकर सहायता राशि जल्द उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। प्रशासन के आश्वासन के बाद परिजनों ने चक्काजाम समाप्त किया और शव लेकर रवाना हो गए। इसके बाद यातायात सामान्य हो सका।
जून-जुलाई में सर्वे हुआ तो जर्जर भवन चिन्हित क्यों नहीं हुए?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल शहर में मौजूद जर्जर और खतरनाक भवनों को लेकर खड़ा हो गया है। बारिश शुरू होने से पहले जून-जुलाई में यदि ऐसे भवनों का सर्वे और चिन्हांकन किया गया था, तो कृषि विभाग का यह जर्जर भवन खतरनाक स्थिति में होने के बावजूद लोगों की आवाजाही के बीच क्यों बना रहा? यदि सर्वे नहीं हुआ तो जिम्मेदार विभागों ने मानसून से पहले सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा क्यों नहीं की?
एक युवक की जान जाने के बाद अब प्रशासन के सामने चुनौती केवल मुआवजा देने की नहीं, बल्कि शहर में मौजूद ऐसे सभी जर्जर भवनों को चिन्हित कर तत्काल सुरक्षित कराने की है, ताकि अगला हादसा होने से पहले लोगों की जान बचाई जा सके।
