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| सिरमौर तहसील कार्यालय की छत का प्लास्टर भरभराकर गिरा, बाल-बाल बचे अधिकारी-कर्मचारी |
सिरमौर/रीवा - रीवा जिले के सिरमौर तहसील कार्यालय में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कार्यालय की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। घटना के समय कार्यालय में अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। गनीमत रही कि प्लास्टर गिरने वाले स्थान पर कोई अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिसके चलते एक बड़ा हादसा टल गया। अचानक छत से प्लास्टर गिरने की घटना से कार्यालय में कुछ समय के लिए हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई। लगातार हो रही बारिश के बीच सरकारी भवन की छत से प्लास्टर गिरना भवन की स्थिति और उसके रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि प्लास्टर किसी अधिकारी, कर्मचारी अथवा कार्यालय में आने वाले आम नागरिक के ऊपर गिर जाता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
बारिश ने खोल दी सरकारी भवनों की हकीकत
रीवा और नवीन मऊगंज जिले सहित पूरे विंध्य क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण जहां कई स्थानों पर जलभराव, सड़क क्षति और आवागमन की समस्याएं सामने आ रही हैं, वहीं सरकारी भवनों की स्थिति भी चिंता का विषय बनती जा रही है। सिरमौर तहसील कार्यालय की घटना ने इस बात को सामने ला दिया है कि सरकारी भवनों के निर्माण के साथ-साथ उनके समय-समय पर रखरखाव और सुरक्षा जांच पर भी पर्याप्त ध्यान दिया जाना आवश्यक है। बारिश के मौसम में पुराने भवनों की छतों, दीवारों और प्लास्टर की स्थिति की जांच कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए, ताकि किसी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।
25 वर्षों के विकास कार्यों पर भी उठे सवाल
इस बारिश ने रीवा-नवीन मऊगंज क्षेत्र में पिछले वर्षों में किए गए विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को भी सामने ला दिया है। जगह-जगह जलभराव, क्षतिग्रस्त सड़कें, अवरुद्ध जल निकासी और अब सरकारी भवनों से प्लास्टर गिरने जैसी घटनाएं यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि विकास कार्यों के निर्माण के साथ उनके रखरखाव और गुणवत्ता की निगरानी कितनी गंभीरता से की गई। नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायत क्षेत्रों के साथ-साथ विभिन्न शासकीय कार्यालयों एवं सरकारी भवनों की स्थिति भी बारिश के दौरान कई जगहों पर सामने आ रही है। ऐसे में केवल नए निर्माण कार्यों पर जोर देने के बजाय पुराने भवनों की सुरक्षा, मरम्मत, जल निकासी और संरचनात्मक मजबूती पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
हादसा होने के बाद ही होगी जिम्मेदारी तय?
सिरमौर तहसील कार्यालय की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि गिरा हुआ प्लास्टर किसी अधिकारी, कर्मचारी या आम नागरिक के ऊपर गिर जाता और जनहानि होती, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होती? क्या सरकारी भवनों की नियमित सुरक्षा जांच के लिए कोई व्यवस्था है? क्या बारिश से पहले पुराने भवनों का निरीक्षण किया जाता है? और यदि निरीक्षण किया जाता है तो जर्जर हिस्सों की मरम्मत समय पर क्यों नहीं होती? घटना के बाद प्रशासन के सामने अब यह आवश्यक है कि तहसील कार्यालय सहित क्षेत्र के अन्य पुराने सरकारी भवनों का भी सुरक्षा परीक्षण कराया जाए। जहां भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है, वहां तत्काल आवश्यक कार्य कराए जाएं, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना की स्थिति पैदा न हो।
फिलहाल सिरमौर तहसील कार्यालय में प्लास्टर गिरने की घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। लेकिन यह घटना सरकारी भवनों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर चेतावनी जरूर दे गई है। बारिश के इस दौर में प्रशासन द्वारा समय रहते भवनों का निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत कराना बेहद जरूरी है।
