| ऊंचाई पर बसे गढ़ में जलभराव ने खोली जलनिकासी व्यवस्था की पोल, पुलिया के सामने निर्माण से रुका पानी का रास्ता |
गढ़/रीवा - ग्राम पंचायत गढ़, जनपद पंचायत गंगेव, तहसील मंगवां, जिला रीवा में बारिश के बाद पैदा हुई जलभराव की स्थिति ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि गढ़ क्षेत्र भौगोलिक रूप से अपेक्षाकृत ऊंचाई पर बसा हुआ माना जाता है। इसके बावजूद यहां बस्तियों में बारिश का पानी भरने लगे तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि निचले क्षेत्रों में जलनिकासी की स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है। गढ़ क्षेत्र से सामने आए वीडियो में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा गढ़ के सामने रहने वाले नरेंद्र पटेल के घर में रात के समय बारिश का पानी घुसने की स्थिति दिखाई दे रही है। परिवार को रातभर चिंता और परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार जलभराव का एक प्रमुख कारण पानी की समुचित निकासी व्यवस्था का अभाव और सड़क किनारे लगातार हो रहे अव्यवस्थित निर्माण हैं।
पुलिया के सामने ही हो गया निर्माण, पानी का रास्ता बाधित
स्थानीय नागरिकों के अनुसार सड़क में बारिश के पानी की निकासी के लिए जो पुलिया बनाई गई है, उसके सामने ही घर का निर्माण हो चुका है। इससे पुलिया से निकलने वाले पानी का रास्ता बाधित हो गया है और पानी आगे जाने के बजाय आसपास के क्षेत्र में फैलने लगा है। यदि पुलिया का पानी किसी खुले और पर्याप्त निकासी मार्ग में न जाकर निर्माण से बाधित हो जाए तो तेज बारिश के दौरान पानी का दबाव आसपास की बस्ती पर बढ़ना स्वाभाविक है। यही स्थिति गढ़ क्षेत्र में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात पैदा करने का प्रमुख कारण बनती दिखाई दे रही है। इस पूरे मामले की स्थल जांच कर यह निर्धारित किया जाना आवश्यक है कि पुलिया और जलनिकासी मार्ग की मूल संरचना क्या थी और वर्तमान निर्माण से उसमें कितना व्यवधान उत्पन्न हुआ है।
पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के आसपास बदला पूरा भूगोल
बताया जाता है कि पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के आसपास जब बस्तियां इतनी विकसित नहीं थीं, तब सड़क के दोनों ओर से बारिश का पानी अपेक्षाकृत आसानी से निकल जाता था। समय के साथ सड़क के पूर्व और पश्चिम दोनों ओर बड़ी संख्या में मकानों का निर्माण हुआ। कई स्थानों पर सड़क की पटरी तक मिट्टी डालकर जमीन को ऊंचा कर दिया गया। इसका सीधा असर पानी की निकासी पर पड़ा है। जिस पानी को प्राकृतिक ढलान के अनुसार आगे निकल जाना चाहिए, वह कई जगह रुककर निचले स्थानों और घरों में पहुंच रहा है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा गढ़ के उत्तर दिशा में बने नए मकानों के आसपास भी जलनिकासी को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर सड़क की नाली अथवा पानी के बहाव का रास्ता बाधित होने से बारिश के समय पानी का दबाव बस्ती की ओर बढ़ जाता है।
ऊंचाई पर बसा गढ़, फिर भी बाढ़ जैसे हालात
गढ़ क्षेत्र के बारे में यह बात अक्सर कही जाती है कि यह आसपास के कई क्षेत्रों की तुलना में ऊंचाई पर बसा हुआ है। ऐसे में यदि ऊंचाई वाले क्षेत्र में भी बारिश का पानी घरों और बस्तियों में घुसने लगे तथा बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाएं, तो यह केवल बारिश की अधिकता का मामला नहीं माना जा सकता। यह जलनिकासी और निर्माण प्रबंधन की गंभीर समस्या की ओर भी संकेत करता है। सवाल यह है कि जब ऊंचाई पर बसे क्षेत्र में पानी नहीं निकल पा रहा है, तो निचले ग्रामीण क्षेत्रों और शहरों की स्थिति कितनी गंभीर होगी? वर्तमान मानसून में रीवा संभाग सहित प्रदेश के कई हिस्सों में नदी-नालों के उफान के साथ-साथ उन स्थानों से भी जलभराव की शिकायतें सामने आ रही हैं, जहां सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति की उम्मीद कम रहती है।
बाढ़ का कारण केवल बारिश नहीं, अव्यवस्थित निर्माण भी
बाढ़ और जलभराव के लिए केवल अत्यधिक बारिश को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं होगा। तेजी से बढ़ती आबादी के बीच प्रत्येक व्यक्ति अपने भूखंड को ऊंचा कर निर्माण कर रहा है। जब एक व्यक्ति अपने सामने की जमीन और सड़क की पटरी को ऊंचा करता है तो पानी का बहाव दूसरे व्यक्ति के घर अथवा दूसरी दिशा में चला जाता है। यही स्थिति धीरे-धीरे पूरे मोहल्ले और बस्ती को जलभराव की चपेट में ला सकती है। शहरों में नालों और प्राकृतिक जलनिकासी मार्गों के आसपास किए गए निर्माण तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिया, नाली और पानी के पुराने रास्तों पर हुए अतिक्रमण भी समस्या को बढ़ाते हैं।
बाढ़ आने के बाद राहत नहीं, पहले चाहिए स्थायी समाधान
बाढ़ आने के बाद प्रभावित परिवारों के प्रति सहानुभूति जताना और राहत पहुंचाना आवश्यक है, लेकिन उससे कहीं अधिक जरूरी है कि जलभराव की स्थिति पैदा ही न हो। इसके लिए ग्राम पंचायत, संबंधित सड़क विभाग और प्रशासन को मिलकर जलनिकासी की पूरी व्यवस्था का स्थल निरीक्षण करना चाहिए। गढ़ में विशेष रूप से उन स्थानों की जांच आवश्यक है जहां पुलिया के सामने निर्माण हो चुका है या सड़क की पटरी और नाली को मिट्टी डालकर ऊंचा किया गया है। यदि किसी निर्माण से सार्वजनिक जलनिकासी बाधित हो रही है तो नियमानुसार जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और पानी के प्राकृतिक बहाव को बहाल किया जाना चाहिए।
क्या जनहानि का इंतजार करेगा प्रशासन?
विंध्य वसुंधरा समाचार द्वारा गढ़ क्षेत्र में सड़क और नाली की समस्या को लगातार प्रमुखता से उठाया जाता रहा है। इसके बावजूद यदि समस्या आज भी बनी हुई है और बारिश के दौरान घरों में पानी घुसने लगा है, तो यह प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए गंभीर चेतावनी है। आज आर्थिक नुकसान हो रहा है, कल स्थिति और बिगड़ सकती है। यदि तेज बारिश के दौरान जलभराव बढ़ता है और कोई जनहानि होती है तो जिम्मेदारी तय करने का सवाल भी खड़ा होगा। इसलिए जरूरी है कि पंचायत और संबंधित विभाग किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय अभी से जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करें। गढ़ की स्थिति प्रशासन के लिए एक चेतावनी है—जब ऊंचाई पर बसा क्षेत्र भी जलभराव से जूझ रहा है, तो निचले इलाकों की सुरक्षा और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर कितनी गंभीर तैयारी की गई है? केवल बाढ़ के बाद नुकसान का आकलन और राहत देना पर्याप्त नहीं; बाढ़ की वजह बनने वाले अवरोधों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर करना ही स्थायी समाधान है।