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| उपमुख्यमंत्री के जन्मदिन समारोह से भाजपा के बड़े चेहरे गायब: आमंत्रण न मिलने से उपजा असंतोष, पार्टी में बढ़ी गुटबाजी की चर्चा |
रीवा/मनगवां - प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के जन्मदिन के अवसर पर 17 अगस्त 2026 को मनगवां बाईपास के समीप आयोजित एक भव्य स्वागत समारोह ने क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में नया बवंडर खड़ा कर दिया है। गंगेव जनपद पंचायत अध्यक्ष विकास तिवारी द्वारा आयोजित इस पांच घंटे लंबे कार्यक्रम (सुबह 11 से शाम 4 बजे तक) को लेकर भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच भारी नाराजगी देखी जा रही है।
कार्यक्रम को लेकर विवाद तब गहरा गया जब यह बात सामने आई कि क्षेत्र के प्रमुख राजनीतिक चेहरों और वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों को इस बड़े आयोजन से दरकिनार कर दिया गया है।
प्रमुख जनप्रतिनिधियों को निमंत्रण न मिलने पर उठे गंभीर सवाल
मनगवां क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय तक अपना वर्चस्व रखने वाले वरिष्ठ नेताओं—पूर्व विधायक पंचूलाल प्रजापति, पूर्व विधायक पन्नाबाई तथा वर्तमान भाजपा विधायक को आमंत्रण न दिए जाने की खबर से पार्टी कार्यकर्ता स्तब्ध हैं।
क्षेत्र के कार्यकर्ताओं का कहना है कि पूर्व चुनावों में भाजपा को मिली लगभग 32 हजार मतों की ऐतिहासिक जीत किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हजारों निष्ठावान कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की जमीनी मेहनत का परिणाम थी। ऐसे में पार्टी के सामाजिक व राजनीतिक मंचों से क्षेत्र के वरिष्ठ चेहरों को गायब रखना कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने जैसा है।
जनता के बीच अपनी सरल व मृदुभाषी शैली के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व जनप्रतिनिधियों के समर्थकों में इस उपेक्षा को लेकर खुलकर असंतोष देखा जा रहा है।
कांग्रेस से आए नेताओं और मूल कार्यकर्ताओं में खींचतान
इस आयोजन के बाद मनगवां में कांग्रेस पृष्ठभूमि से भाजपा में आए नेताओं और मूल भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच की अंदरूनी गुटबाजी अब खुलकर सतह पर आ गई है। स्थानीय कार्यकर्ताओं के एक बड़े वर्ग का मानना है कि भाजपा एक अनुशासन और विचारधारा आधारित संगठन है। यदि अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए नेताओं के बीच सामंजस्य नहीं बिठाया गया और व्यक्तिगत खींचतान को बढ़ावा मिला, तो इससे संगठन की जड़ें कमजोर होंगी।
इसके अतिरिक्त, क्षेत्र की राजनीति में स्वर्गीय श्रीनिवास तिवारी के राजनीतिक परिवार के प्रभाव का उल्लेख करते हुए राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस समारोह को केवल एक सामान्य जन्मदिन आयोजन के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिशें छिपी हैं।
प्रदेश व जिला नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग
आयोजकों की ओर से निमंत्रण सूची को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। लेकिन निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने अब भाजपा के जिला एवं प्रदेश नेतृत्व से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सत्ता और संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक नेतृत्व की भावना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
क्या संगठन दे पाएगा एकजुटता का संदेश?
अब सभी की निगाहें भाजपा के उच्च नेतृत्व पर टिकी हैं कि क्या वे स्थानीय स्तर पर पनप रही इस गुटबाजी को रोकने के लिए कोई कड़ा कदम उठाएंगे या नहीं। 17 अगस्त के इस आयोजन में किन नेताओं की उपस्थिति रहती है और कौन-कौन दूरी बनाए रखता है, इससे मनगवां की आगामी राजनीति की दिशा और दशा तय होने के स्पष्ट संकेत मिलेंगे।
