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| अतिवृष्टि ने खोली विकास कार्यों की पोल, करोड़ों के निर्माण पर उठे गंभीर सवाल |
नईगढ़ी/मऊगंज - लगातार हुई अतिवृष्टि ने नईगढ़ी जनपद क्षेत्र में जनजीवन को प्रभावित करने के साथ ही ग्रामीण विकास के कई निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के बाद कई स्थानों पर सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, पुल-पुलियों के हिस्से बह गए और आवागमन बाधित हुआ है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्तओं का आरोप है कि जिन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर पहले से शिकायतें की जा रही थीं, बारिश के बाद उनकी वास्तविक स्थिति सामने आ गई है।
सबसे गंभीर आरोप जोधपुर प्रथम में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन बताए जा रहे मुख्यमंत्री सरोवर को लेकर लगाए गए हैं। अगस्त क्रांति मंच के संयोजक कुंज बिहारी तिवारी का आरोप है कि स्वीकृत लागत की तुलना में मौके पर बेहद कम कार्य कराया गया और बारिश के बाद निर्माण की स्थिति ने गुणवत्ता एवं खर्च को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि मौके पर हुए वास्तविक कार्य और स्वीकृत राशि की उच्चस्तरीय तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जानी चाहिए। हालांकि निर्माण पर वास्तव में कितनी राशि खर्च हुई है, इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।
बैरिहा मार्ग की पुलिया क्षतिग्रस्त, आवागमन पर संकट
ग्राम पंचायत टौरा से बैरिहा गांव की ओर जाने वाले मार्ग पर बनी पुलिया भी अतिवृष्टि में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह निर्माण कुछ समय पहले ही कराया गया था। पुलिया और सड़क की मौजूदा हालत को लेकर ग्रामीण निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। तस्वीरों में सड़क का बड़ा हिस्सा कटकर बहा और पुलिया क्षतिग्रस्त दिखाई दे रही है।
साथ ही भीर में लाखों रुपये की लागत से निर्मित कई पुल धरासाई हो गए
इसी तरह क्षेत्र की अन्य ग्रामीण सड़कों के क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। मौहरिया से क्षत्रगढ़/भदावल की ओर जाने वाले मार्गों के प्रभावित होने का दावा किया गया है। कई जगह सड़क पर बड़े गड्ढे और कटाव के कारण ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
“बारिश ने सामने ला दी निर्माण की हकीकत”
अगस्त क्रांति मंच के संयोजक कुंज बिहारी तिवारी ने कहा कि निर्माण कार्यों में अनियमितताओं को लेकर पूर्व में कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि अब अतिवृष्टि के बाद क्षतिग्रस्त निर्माण स्वयं जांच की आवश्यकता बता रहे हैं। श्री तिवारी ने मांग की कि मुख्यमंत्री सरोवर, क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों और ग्रामीण विकास के अन्य कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण, भौतिक सत्यापन और भुगतान अभिलेखों की जांच कराई जाए। यदि जांच में शासकीय राशि के दुरुपयोग अथवा घटिया निर्माण की पुष्टि होती है तो केवल वसूली तक कार्रवाई सीमित न रखकर जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी, निर्माण एजेंसी और ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।
जनपद अध्यक्ष ने कलेक्टर से कहा—मैदानी स्थिति देखें
जनपद पंचायत नईगढ़ी की अध्यक्ष ममता कुंज बिहारी तिवारी ने भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर क्षतिग्रस्त सड़क एवं पुल-पुलियों की स्थिति देखी। उन्होंने कलेक्टर मऊगंज से मांग की है कि जिला प्रशासन की संयुक्त तकनीकी टीम प्रभावित क्षेत्रों में भेजकर मौके पर जांच कराए। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि से गरीब परिवारों के घर, फसल और गृहस्थी प्रभावित हुई है, वहीं सड़कों एवं पुल-पुलियों के टूटने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। इसलिए एक ओर प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत दी जाए और दूसरी ओर क्षतिग्रस्त सार्वजनिक निर्माणों की गुणवत्ता की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
प्रशासनिक जांच से स्पष्ट होगी वास्तविकता
फिलहाल निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार, खर्च की वास्तविक राशि और जिम्मेदार अधिकारियों या निर्माण एजेंसियों की भूमिका संबंधी आरोपों की आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। ऐसे में आरोपों की वास्तविकता तकनीकी जांच, स्वीकृत प्राक्कलन, माप पुस्तिका, भुगतान विवरण और मौके पर हुए कार्य के भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। मुख्य सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की स्वीकृत लागत वाले निर्माण यदि एक अतिवृष्टि में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, तो क्या निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप हुआ था? अब ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की निगाह जिला प्रशासन की कार्रवाई पर है।
