| धर्म, शिक्षा और अनुशासन के बल पर युवाओं के प्रेरणास्त्रोत बन रहे हैं मेहुल श्रीवास्तव |
शहडोल - वर्तमान समय में समाज को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है, जो केवल विचारों तक सीमित न रहकर अपने आचरण और कार्यों से युवाओं का मार्गदर्शन करे। इसी उद्देश्य के साथ सामाजिक एवं धार्मिक क्षेत्र में सक्रिय मेहुल श्रीवास्तव धर्म, शिक्षा और अनुशासन को अपने जीवन का मूल आधार बनाकर युवाओं को संस्कारित, जागरूक और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित बनाने का सतत प्रयास कर रहे हैं।
मेहुल श्रीवास्तव का स्पष्ट मानना है कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसका युवा वर्ग होता है। यदि युवाओं को धर्म आधारित नैतिक शिक्षा, अनुशासन, चरित्र निर्माण और राष्ट्रभक्ति का सही मार्गदर्शन मिले, तो वे केवल अपने भविष्य का ही नहीं, बल्कि समाज और देश के उज्ज्वल भविष्य का भी निर्माण कर सकते हैं। इसी विचारधारा के साथ वे युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए विभिन्न धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं जनजागरण कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
उनके नेतृत्व में आयोजित धर्म शिक्षा वर्गों, विचार गोष्ठियों, युवा संवाद, सेवा कार्यों एवं सामाजिक अभियानों के माध्यम से युवाओं में सनातन संस्कृति के प्रति आस्था, सामाजिक उत्तरदायित्व, अनुशासन, सेवा भावना, संगठन शक्ति और राष्ट्र प्रथम की भावना को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों में भारतीय संस्कृति, महापुरुषों के आदर्श, परिवार व्यवस्था, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नारी सम्मान, गौ सेवा तथा राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों पर विशेष रूप से प्रेरणा प्रदान की जाती है।
मेहुल श्रीवास्तव का कहना है कि धर्म का वास्तविक स्वरूप समाज को जोड़ना, चरित्र का निर्माण करना और व्यक्ति के भीतर कर्तव्यबोध उत्पन्न करना है। जब धर्म, शिक्षा और अनुशासन एक साथ चलते हैं, तभी एक सशक्त समाज और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण संभव होता है। यही कारण है कि वे युवाओं को केवल भाषणों से नहीं, बल्कि स्वयं सेवा, समर्पण और अनुशासित जीवन का उदाहरण प्रस्तुत कर प्रेरित करने का प्रयास करते हैं।
समाज के विभिन्न वर्गों में उनके कार्यों को सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में युवा उनके नेतृत्व से प्रेरित होकर सामाजिक सेवा, धार्मिक गतिविधियों, जनजागरण अभियानों और राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। उनका उद्देश्य ऐसी युवा शक्ति तैयार करना है, जो अपने संस्कारों, कर्तव्यों और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति सदैव जागरूक रहे।
लगातार जनसंपर्क, सेवा कार्यों और धर्म आधारित सामाजिक चेतना के प्रसार के कारण मेहुल श्रीवास्तव आज युवाओं के बीच एक प्रेरणास्त्रोत के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। उनका यह प्रयास केवल वर्तमान तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कारित, अनुशासित, शिक्षित और राष्ट्रनिष्ठ बनाने की दिशा में एक सतत सामाजिक अभियान के रूप में आगे बढ़ रहा है।