नायब तहसीलदार बनकर स्वास्थ्यकर्मियों से साइबर ठगी, दो ANM के खातों से 83 हजार पार

नायब तहसीलदार बनकर स्वास्थ्यकर्मियों से साइबर ठगी, दो ANM के खातों से 83 हजार पार

रीवा - नायब तहसीलदार बनकर स्वास्थ्य विभाग की एएनएम कार्यकर्ताओं से साइबर ठगी का मामला सामने आया है। जालसाजों ने सरकारी अधिकारी बनकर स्वास्थ्यकर्मियों का भरोसा जीता और दो महिला स्वास्थ्यकर्मियों के खातों से करीब 83 हजार रुपये पार कर दिए। वहीं आधा सैकड़ा से अधिक एएनएम को फोन कर ठगी का प्रयास किया गया, लेकिन कई स्वास्थ्यकर्मी समय रहते सतर्क हो गईं। मामला उप स्वास्थ्य केंद्र रगौली और बीड़ा में पदस्थ एएनएम कार्यकर्ताओं से जुड़ा है। पीड़ित स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार 8 अगस्त को उनके मोबाइल पर फोन आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को नायब तहसीलदार अशोक मीणा बताते हुए बातचीत शुरू की। जालसाज ने स्वास्थ्य केंद्र के सुपरवाइजर, मेडिकल ऑफिसर, सीएचओ और एएनएम सहित वहां पदस्थ स्टाफ से जुड़ी सही जानकारी देकर पहले विश्वास हासिल किया।

इसके बाद जालसाज ने स्वास्थ्य केंद्र के भवन की मरम्मत के लिए आए सरकारी बजट का हवाला दिया और रकम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू की। पीड़िताओं को यूपीआई के माध्यम से पैसे भेजने के लिए कहा गया। इसी दौरान पहले महज 10 रुपये भेजने की बात कही गई, लेकिन प्रक्रिया के बीच उनके बैंक खातों से हजारों रुपये निकल गए। जानकारी के अनुसार एक पीड़िता के खाते से करीब 53 हजार रुपये, जबकि दूसरी महिला स्वास्थ्यकर्मी के खाते से करीब 30 हजार रुपये ठग लिए गए। इस तरह दोनों खातों से करीब 83 हजार रुपये की साइबर ठगी हुई। जालसाजों ने केवल दो एएनएम को ही निशाना नहीं बनाया, बल्कि आधा सैकड़ा से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को फोन कर ठगी की कोशिश की। हालांकि कई एएनएम को बातचीत और पैसे ट्रांसफर कराने के तरीके पर संदेह हुआ और उन्होंने समय रहते सतर्कता बरतते हुए खुद को ठगी से बचा लिया।

घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों में नाराजगी देखी गई। पीड़ित एएनएम सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी एकजुट होकर एसपी कार्यालय पहुंचीं और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। स्वास्थ्यकर्मियों ने फर्जी अधिकारी बनकर फोन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई और ठगी की रकम वापस दिलाने की मांग की। अब पुलिस के सामने फर्जी नायब तहसीलदार बनकर स्वास्थ्यकर्मियों को फोन करने वाले जालसाज और उसके नेटवर्क की पहचान करने की चुनौती है। मामले में कॉल डिटेल, बैंक खातों और यूपीआई लेनदेन की जांच के आधार पर साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

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