| धान खरीदी सेटल कराने के एवज में ₹96 हजार की रिश्वत लेते जिला सहकारी बैंक अधिकारी लोकायुक्त के ट्रैप में |
सतना/नागौद: सतना जिले के नागौद में धान खरीदी से जुड़े मामले को रफा-दफा करने के नाम पर ₹1 लाख की रिश्वत मांगने वाले जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारी केसी कृष्णकांत शर्मा को रीवा लोकायुक्त की टीम ने बुधवार को ₹96 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई आरोपी अधिकारी के निवास स्थान पर 15 सदस्यीय टीम द्वारा अंजाम दी गई, जिसके बाद से सहकारिता विभाग में हड़कंप मच गया है।
3% कमिशन के हिसाब से मांगी गई थी रिश्वत
जानकारी के अनुसार, नागौद स्थित सहकारी समिति में वर्ष 2025-26 के दौरान हुई धान खरीदी से संबंधित मामले में कार्रवाई से बचाने और फाइल आगे न बढ़ाने के एवज में समिति प्रबंधक सिद्धार्थ ओझा से रिश्वत की मांग की जा रही थी। लोकायुक्त के प्रारंभिक विवरण के मुताबिक, कुल धान खरीदी राशि के लगभग 3 प्रतिशत के हिसाब से करीब ₹1 लाख मांगे गए थे, जिसकी बात बाद में ₹96 हजार में तय हुई।
शिकायतकर्ता सिद्धार्थ ओझा ने इसकी लिखित शिकायत लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक, रीवा के समक्ष की थी। प्राथमिक सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप की कार्रवाई की।
व्यवस्था में बिचौलियों और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप
यह ताजा मामला एक बार फिर सहकारिता व्यवस्था की पोल खोल रहा है। धान-गेहूं खरीदी प्रक्रिया में फर्जी किसानों के नाम पर पंजीयन, खरीदी केंद्र, ट्रांसपोर्टर और वेयरहाउस की सांठगांठ से भ्रष्टाचार तथा सरकारी मापदंडों की अनदेखी जैसी शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं।
सहकारिता विभाग के माध्यम से संचालित पैक्स (PAACS) समितियों का मूल उद्देश्य किसानों को खाद, बीज, ऋण और वितरण प्रणाली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। परंतु वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के कारण सरकार द्वारा दी जाने वाली बड़ी राहत राशियों का सीधा लाभ किसानों तक नहीं पहुँच पाता, जिससे व्यवस्था पर उनका भरोसा कमजोर होता है।
क्या केवल एक अधिकारी तक सीमित रहेगी कार्रवाई?
लोकायुक्त की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या जांच केवल रिश्वत लेते पकड़े गए अधिकारी तक ही सीमित रहेगी या फिर धान खरीदी, परिवहन, भंडारण, स्टॉक और ऋण वितरण से जुड़े पूरे तंत्र की निष्पक्ष जांच होगी?
सहकारिता विशेषज्ञों और किसानों की मांग है कि रीवा संभाग में पैक्स समितियों की कार्यप्रणाली, वित्तीय रिकॉर्ड, समितियों के घाटे और खाद्यान्न वितरण की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए। रीवा लोकायुक्त द्वारा फिलहाल मामले के दस्तावेजों और बातचीत के साक्ष्यों की जांच की जा रही है, जिससे आगे अन्य लिप्त लोगों के नामों का खुलासा होने की संभावना है।